उत्तराखंड में 250 मदरसों पर ताले, अब बनेंगे स्कूल

देहरादून 

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मदरसों पर बेवजह आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड को खत्म करना एक ऐतिहासिक गलती है। 

मौलाना ने दावा किया कि मदरसों से जुड़े करीब 55 हजार उलमा और छात्र अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। 1857 से लेकर 1947 तक और उसके बाद भी मदरसों के उलमा देश की एकता के लिए खड़े रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी बिना इतिहास पढ़े ‘जिहाद की शिक्षा’ की बात कर रहे हैं, जो असंवैधानिक और अनैतिक है। उनके मुताबिक संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को शिक्षण संस्थाओं में सुधार की बात करनी चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए।

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मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसों पर ताले लगा दिए और 125 सूफी मजारों पर बुलडोजर चलाया। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उत्तर प्रदेश में भी नहीं उठाया गया और राज्य सरकार इस्लामी धार्मिक शिक्षा खत्म करने पर उतारू है।

वहीं मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य में विभाजनकारी सोच को रोकने के लिए मदरसा बोर्ड समाप्त किया गया है। उनका कहना था कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो शिक्षा बोर्ड तय करता है, ताकि वे देश और समाज की प्रगति में योगदान दे सकें।

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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 जुलाई 2026 से इन संस्थानों में समान पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर ‘जिहादी’ सोच पनप रही थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी। सरकार ने 250 से ज्यादा अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की, क्योंकि उनके रिकॉर्ड और पढ़ाई का विवरण स्पष्ट नहीं था।

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