जयपुर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण (Phase-2) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जयपुर मेट्रों के दूसरे चरण में 13037.66 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह परियोजना उत्तर से दक्षिण जयपुर को आपस में जोड़ते हुए शहर की तस्वीर बदल देगी।जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर बनेगा। इस रूट पर कुल 36 स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के सबसे व्यस्त इलाकों को कवर करेंगे। इस परियोजना को केंद्र और राजस्थान सरकार के फिफटी-फिफटी भागीदारी वाले संयुक्त उद्यम के रूप में राजस्थान मेट्रो रेल
निगम लिमिटेड (RMRCL) पूरा करेगी।
जयपुर मेट्रो फेज-2 : इन इलाकों को कवर करेगा
कैबिनेट के एक बयान के अनुसार, जयपुर मेट्रो फेज-2 में मेट्रो प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक दौड़ेगी। फेज-2 में बनने वाला कॉरिडोर सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, वीकेआईए, जयपुर हवाई अड्डा, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबारी और विद्याधर नगर जैसे व्यस्त इलाकों को जोड़ेगा। यहां 36 स्टेशन बनेंगे। इसमें एयरपोर्ट के क्षेत्र में अंडरग्राउंड स्टेशन भी शामिल हैं। यहां इंटरचेंज की भी सुविधा होगी। इसे पहले से चल रहे फेज-1 मेट्रो से जोड़ा जाएगा। इससे पूरे शहर में एक एकीकृत और निरंतर मेट्रो नेटवर्क सुनिश्चित होगा।
जयपुर मेट्रो पहले फेज में कहां से कहां तक चलती है?
जयपुर में पहले चरण के तहत मेट्रो मानसरोवर से बड़ी चौपर तक, पूर्व-पश्चिम गलियारे पर 11.64 किमी की दूरी तय करती है। इसमें 11 स्टेशन हैं। यह प्रणाली जयपुर के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को केंद्रीय व्यापारिक जिले से जोड़ती है, जो हेरिटेज वॉल सिटी का हिस्सा है। उत्तर-दक्षिण अक्ष पर नियोजित जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण मौजूदा गलियारे का पूरक होगा और पूरे शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम में काफी कमी आएगी। और शहरी में आवागमन में सुधार होगा।
जयपुर मेट्रो में हर दिन लगभग 60 हजार यात्री करते हैं सफर
वर्तमान में, जयपुर मेट्रो के पहले चरण में प्रतिदिन औसतन लगभग 60 हजार यात्री यात्रा करते हैं। जयपुर मेट्रो पहले चरण में 11.64 किमी के छोटा रूट पर दौड़ रही है। दूसरे चरण के चालू होने के साथ, मेट्रो नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे जयपुर में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
मेट्रो का काम सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य
कैबिनेट के बयान के अनुसार, मेट्रो रेल नीति, 2017 के अनुसार, केंद्र और राजस्थान सरकार से इक्विटी समर्थन, ऋण और बहुपक्षीय वित्तपोषण के माध्यम से वित्तपोषण की संरचना की गई है। परियोजना का वित्तपोषण मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, ऋण और बहुपक्षीय फंडिंग के माध्यम से किया जाएगा। सरकार ने इसे सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।


