लखपति दीदी सुमा उइके : संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

भोपाल. 
बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की श्रीमती सुमा उइके आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता की कहानी इतनी प्रेरणादायक है कि इसका उल्लेख प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित “मन की बात” कार्यक्रम में भी किया गया।

संघर्षों से भरी थी शुरुआत
जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा उइके का जीवन पहले बेहद सीमित दायरे में था। वे केवल घर-गृहस्थी तक ही सीमित थीं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय मात्र 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन था।

ये भी पढ़ें :  मध्यप्रदेश में दीपावली त्योहर पर जमकर आतिशबाजी, ग्वालियर शहर की आबोहवा बिगड़ी

स्वयं सहायता समूह बना बदलाव की कुंजी
वर्ष 2019 में सुमा उइके “जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने रिवाल्विंग फंड (RF) की सहायता से जैविक मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे आय के नए रास्ते खुले।

कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय
आगे बढ़ते हुए सुमा दीदी ने जनपद पंचायत कटंगी में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने बैंक से 6 लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर थर्मल थेरेपी सेंटर की शुरुआत की। इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि उन्होंने अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कैंटीन और थेरेपी सेंटर में समूह की सदस्य महिलाएं भी कार्य कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका भी सशक्त हुई है।

ये भी पढ़ें :  जनजातीय कल्याण की योजनाओं का लाभ, अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए: राज्यपाल पटेल

आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा
आज सुमा उइके की व्यक्तिगत मासिक आय 19 हजार रुपए तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय 32 हजार रुपए हो गई है। यह बदलाव उनके संघर्ष, मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम है।

बनीं प्रेरणा और मिसाल
आज सुमा उइके न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वे अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

ये भी पढ़ें :  मध्यप्रदेश–जर्मनी टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन सहयोग 2025

नारी सशक्तिकरण की प्रतीक
सुमा उइके की यह यात्रा बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिले, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज वे “लखपति दीदी” बनकर नारी सशक्तिकरण की एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरी हैं। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment