गडकरी का नया विजन: कारों में 100% इथेनॉल पेट्रोल का होगा इस्तेमाल, कंपनियों के सामने ये बड़े चैलेंज

नई दिल्ली

देश के अंदर अब E20 यानी 20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल मिलने लगा है। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को धीरे-धीरे करके बढ़ाएगी। हालांकि, अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत से पेट्रोल में "100% इथेनॉल ब्लेंडिंग" की तरफ बढ़ने का एक अपील की है। उन्होंने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में बोलते हुए कहा कि ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर होना अब सिर्फ एक पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है।

गडकरी का ये बयान ऐसे समय में आया हैं जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पश्चिम एशिया में चल रहे लंबे संघर्ष से जूझ रहे हैं, जिसने पारंपरिक तेल सप्लाई चेन को काफी हद तक बाधित कर दिया है। साथ ही, आयात बिलों को बढ़ा दिया है। उनके इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन के आयात पर भारत की भारी निर्भरता है। वर्तमान में देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 87% आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे सरकारी खजाने से सालाना लगभग 22 लाख करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं।

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अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाना
गडकरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे "संकट" ने इस व्यवस्था की कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिससे भारत के लिए अपने ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इंटरनेशनल कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से अलग करना जरूरी हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि 100% इथेनॉल (E100) मॉडल की तरफ बढ़कर (जैसा ब्राजील में सफलतापूर्वक लागू किया गया है) भारत अपने विशाल कृषि अधिशेष का लाभ उठा सकता है। यह बदलाव न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि किसानों को "अन्नदाता" से "ऊर्जादाता" में बदलकर उन्हें सीधा आर्थिक बढ़ावा भी देगा।

ICE इंजन में बदलाव की जरूरत
भारत ने पिछले तीन सालों में अपने बायोफ्यूल प्रोग्राम में तेजी से प्रगति की है। 1 अप्रैल, 2026 को पूरे देश में E20 (20% इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल) को लागू करने के बाद, सरकार अब अगले लक्ष्य की ओर देख रही है। जहां E20 का उपयोग मौजूदा इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) में मामूली बदलावों के साथ किया जा सकता है। वहीं E100 या E85 की ओर बढ़ने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (FFVs) की तरफ एक मजबूत बदलाव की आवश्यकता है।

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गडकरी ने बताया कि आने वाले CAFE III (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) स्टैंडर्ड, जो 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले हैं, ये इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देंगे। बताया जा रहा है कि E85 फ्यूल के लिए एक मसौदा अधिसूचना पहले से ही अंतिम चरण में है, जो इस बात का संकेत है कि हाी ब्लेंडिंग स्तरों के लिए बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है।

अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा
गडकरी ने साफ किया कि जहां एक तरफ सरकार अल्टरनेटिव फ्यूल को बढ़ावा दे रही है। वहीं, ग्राहकों को इस बदलाव के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके बजाय, ध्यान टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट की क्वालिटी को बेहतर बनाने पर होगा, ताकि ग्रीन गाड़ियां ज्यादा आकर्षक लगें। मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौती ऐसे इंजन बनाने में है जो ज्यादा इथेनॉल कंसंट्रेशन को संभाल सकें, क्योंकि यह आम पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा कोरोसिव होता है।

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ग्रीन हाइड्रोजन में भी संभावनाएं
इथेनॉल के अलावा, गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं को भी "फ्यूचर फ्यूल" के तौर पर खास तौर पर बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर प्रोडक्शन लागत को घटाकर लगभग $1 प्रति किलोग्राम तक लाया जा सके, तो यह भारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में क्रांति ला सकता है। हालांकि, अभी के लिए, इथेनॉल ही "जहरीले" फॉसिल फ्यूल का सबसे ज्यादा मुमकिन और तुरंत मिलने वाला ऑप्शन बना हुआ है। यह एक ऐसा सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पेश करता है जो खेती के कचरे को भारत के भविष्य की तरक्की के लिए ईंधन में बदल देता है।

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