अग्नि-6 मिसाइल पर DRDO चीफ का बड़ा बयान, कहा- ‘सरकार दे ग्रीन सिग्नल, हम तैयार हैं’

बेंगलुरु 

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा कि अग्नि-6 (Agni-6) बैलिस्टिक मिसाइल का विकास पूरी तरह से सरकार के फैसले पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि यह सरकार का निर्णय है. जब भी सरकार हमें हरी झंडी देगी, हम तैयार हैं। 

यह बयान भारत की रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करने वाले अग्नि-6 प्रोजेक्ट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है. अग्नि-6 भारत का अगली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) होगी, जो 10,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार करने में सक्षम होगी। 

अग्नि-6 मिसाइल क्या है?
अग्नि-6 DRDO द्वारा विकसित की जा रही भारत की सबसे एडवांस और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. यह अग्नि-5 का अगला और अधिक शक्तिशाली संस्करण होगा. यह मिसाइल MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक से लैस होगी, यानी एक ही मिसाइल में कई न्यूक्लियर वॉरहेड लगाए जा सकते हैं, जो अलग-अलग लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकते हैं। 

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यह मिसाइल मुख्य रूप से स्ट्रैटेजिक डिटरेंस के लिए विकसित की जा रही है. इससे भारत चीन के किसी भी हिस्से को आसानी से टारगेट कर सकेगा और न्यूक्लियर ट्राएड को और मजबूत बनाएगा। 

    रेंज: 10 से 12 हजार किलोमीटर,  हल्के पेलोड के साथ यह 14-16 हजार किमी तक भी जा सकती है 

    वॉरहेड क्षमता: लगभग 3 टन (3,000 किलोग्राम) न्यूक्लियर या थर्मोन्यूक्लियर वॉरहेड.
    MIRV क्षमता: 10-11 वॉरहेड ले जाने की क्षमता. हर वॉरहेड 250 किलोटन तक की शक्ति वाला हो सकता है.

    इंजन: मल्टी-स्टेज (तीन या चार स्टेज) सॉलिड फ्यूल रॉकेट.

    वजन: 55,000 से 70,000 किलोग्राम (55-70 टन).
    लंबाई: 20 से 40 मीटर (अग्नि-5 से लंबी).
    व्यास: लगभग 2 मीटर.
    लॉन्च प्लेटफॉर्म: रोड-मोबाइल ट्रांसपोर्टर एरेक्टर लॉन्चर (TEL) और रेल-मोबाइल. भविष्य में सबमरीन से लॉन्च करने वाला वेरिएंट भी विकसित किया जा सकता है.
    गाइडेंस सिस्टम: इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम के साथ रिंग लेजर जायरोस्कोप, IRNSS (नेविक) और टर्मिनल गाइडेंस। 
    स्पीड: 30870 km/hr 

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अग्नि-6 में कंपोजिट मटेरियल का इस्तेमाल किया जाएगा, जो इसे हल्का और ज्यादा क्षमतावान बनाएगा. यह K-5 और K-6 सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों की तकनीक पर भी आधारित होगी। 

DRDO ने अग्नि-6 का डिजाइन पूरा कर लिया है. अब प्रोटोटाइप मैन्युफैक्चरिंग का काम चल रहा है. 2025 में डिजाइन फाइनल हो चुका है. हालांकि, पूर्ण रूप से प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और फ्लाइट टेस्ट करने का फैसला केंद्र सरकार को करना है। 
 
डॉ. समीर कामत का बयान साफ संकेत देता है कि DRDO तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार है और इंतजार सिर्फ सरकारी मंजूरी का है. भारत वर्तमान में अग्नि-5 को तैनात कर चुका है, जो 5000+ किमी रेंज वाली मिसाइल है और MIRV टेस्ट भी सफलतापूर्वक कर चुका है. अग्नि-6 इसके बाद का कदम होगा। 

क्यों जरूरी है अग्नि-VI?
भारत दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. चीन के पास 10,000 किमी से ज्यादा रेंज वाली कई ICBM हैं. अग्नि-6 भारत को समान स्तर की क्षमता देगी, जिससे 'दूसरे हमले की क्षमता' (Second Strike Capability) और मजबूत होगी। 

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MIRV तकनीक से एक मिसाइल कई शहरों या सैन्य ठिकानों को एक साथ नष्ट कर सकती है, जिससे दुश्मन के लिए डिफेंस बहुत मुश्किल हो जाता है. यह मिसाइल भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस को और विश्वसनीय बनाएगी। 

अभी अग्नि-6 पूरी तरह से विकास के चरण में है. सरकार की मंजूरी मिलने के बाद DRDO फ्लाइट टेस्ट शुरू करेगा. सफल टेस्ट के बाद इसे भारतीय सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड में शामिल किया जाएगा.

डॉ. समीर वी. कामत का बयान दिखाता है कि DRDO आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. जब भी सरकार फैसला लेगी, DRDO अग्नि-6 को समय पर विकसित करके देश की सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा। 

 

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