होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की हल्की पनडुब्बियों की तैनाती, बढ़ा तनाव

तेहरान

 ईरान ने अपनी हल्की पनडुब्बियों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात करने का फैसला लिया है। फारस खाड़ी की डॉल्फिन कहे जाने वाली ये पनडुब्बियां दुश्मन के जहाजों और युद्धपोतों को निशाना बना सकती हैं। ईरान की ओर से यह ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के साथ उसका तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बलों में इस हफ्ते गोलाबारी के बाद होर्मुज के आसपास भारी तनातनी है। ऐसे में ईरान की ओर से पनडुब्बियों की तैनाती समुद्र में चल रहे टकराव को और ज्यादा बढ़ा सकती है।

ईरान नेवी के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी की ओर से रविवार को ऐलान किया गया है कि स्वदेशी रूप से निर्मित हल्की पनडुब्बियां 'फारसी खाड़ी की डॉल्फिन' को होर्मुज जलडमरूमध्य में उतार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि खतरों, क्षमताओं और ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर इन सबमरीन को तैनात और विस्तारित किया जा रहा हैं।

ये भी पढ़ें :  आसिम मुनीर की डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की बहुत चर्चा, वाइट हाउस में लंच कराने की कीमत वसूली जा सकती है

अलर्ट पर रहती हैं ये पनडुब्बी
भारत में ईरान के दूतावास के एक्स अकाउंट पर बताया गया है कि फारसी खाड़ी की डॉल्फिन हर समय अलर्ट पर रहती हैं और कार्रवाई के लिए तैयार रहती हैं। ये हल्की पनडुब्बियां होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जलक्षेत्र में समुद्र तल पर लंबे समय तक विश्राम (बॉटम रेस्ट) कर सकती हैं। इससे यह दुश्मन जहाजों पर नजर रख पाती हैं।

ईरानी नेवी की ओर से बताया गया है कि उसकी ये पनडुब्बियां ना सिर्फ दुश्मन जहाजों को ट्रैक करती हैं बल्कि साथ ही जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकती हैं। दुश्मन के जहाजों को ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करना इन पनडुब्बियों की क्षमता का ही एक अहम हिस्सा है, जो समुद्र में इनकी ताकत बढ़ाता है।

ये भी पढ़ें :  मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर: Apple ने UAE में अपना ऑफिस और स्टोर्स किए बंद

पानी के नीचे कर रहीं गश्त
बयान में कहा गया है कि ईरान की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में 'डेना' डिस्ट्रॉयर पर मारे गए लोगों को समर्पित एक ऑपरेशन के दौरान ये पनडुब्बियां पानी की सतह पर आईं। कई सैन्य-गठन अभ्यास करने के बाद वे अपने मिशन को जारी रखने के लिए फिर से पानी के नीचे चली गईं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का अहम समुद्री रूट है। खाड़ी देशों से दुनिया के बड़े हिस्से में इसी रास्ते से तेल-गैस पहुंचता है। अमेरिका और इजरायल के 28 फरवरी को किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने यहां यातायात रोक दिया है। अमेरिका ने भी इसे ब्लॉक करते हुए दुनिया के जहाजों को इससे ना गुजरने देने का ऐलान कर दिया है। इसके चलते यह इलाका संवेदनशील बना हुआ है।

ये भी पढ़ें :  वेनेजुएला के बाद ट्रंप का आक्रामक रुख, दो देशों को युद्ध की धमकी और भारत पर ट्रेड–टैरिफ का दबाव

एनर्जी सप्लाई पर संकट
ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई को संकट में डाल दिया है। खाड़ी देशों के होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर तेल-गैस की कीमत पर हो रहा है। इसका सीधा असर साउथ एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्से के साथ-साथ अमेरिकी बाजार पर भी हुआ है। भारत में भी इसका प्रभाव देखा गया है।

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment