राजस्थान में पेंशन नियमों में बड़ा बदलाव, अब फेस ऑथेंटिकेशन से बनेगा जीवन प्रमाण पत्र

जयपुर
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने पेंशन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं. पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बाद, अब 'राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996' में संशोधन के आधिकारिक आदेश शनिवार को जारी कर दिए गए हैं. राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ ही नई अधिसूचना भी लागू हो गई है. आइए जानते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और आपको इनका सीधा फायदा कैसे मिलेगा.

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चेहरा दिखाकर जमा होगा 'जीवन प्रमाण पत्र'
अब पेंशनरों को अपना जीवितता प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने के लिए दफ्तरों या बैंकों की लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा. सरकार ने आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को मंजूरी दे दी है. इसका मतलब है कि अब पेंशनर नई तकनीक की मदद से सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे.

SSO ID के जरिए वेरिफिकेशन हुआ आसान
पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी पहले से काफी सरल कर दिया गया है. नए नियम के तहत, अब चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) से ऊपर के कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) का उपयोग कर सकेंगे. वे इसके जरिए ई-साइन (e-Sign) करके पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत प्रमाणित कर सकते हैं.

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दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव
सरकार ने दिव्यांगों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के प्रावधानों में भी जरूरी संशोधन किए हैं. नए नियमों के मुताबिक, अब दिव्यांगता का प्रमाण पत्र किसी सक्षम प्राधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया हुआ ही पूरी तरह से मान्य होगा. अगर दिव्यांगता परमानेंट है, तो यह प्रमाण पत्र जिंदगी में सिर्फ एक बार ही प्रस्तुत करना होगा. लेकिन, अगर अस्थायी दिव्यांगता की स्थिति में हर 3 साल के बाद नया प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा.

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