होर्मुज से भारत के लिए राहतभरी खबर, LNG लेकर पहला टैंकर ‘दिशा’ गुजरात पहुंचा

अहमदाबाद 

अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील होते ही भारत को पहली खुशखबरी मिल गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहला एलएनजी जहाज भारत आ चुका है. जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पहला LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ आज यानी शुक्रवार को गुजरात में भरूच के दहेज पोर्ट पर पहुंचा. यह दहेज एलएनजी टर्मिनल पर आ गया है. इस तरह से तीन महीने का इंतजार खत्म हुआ. एनएनजी करियर दिशा ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा हुआ था। 

दरअसल, गुजरात के दहेज LNG टर्मिनल पर आज LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक पहुंच गया. इस जहाज ने 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार किया था. इस तरह से इस जहाज का तीन महीने से अधिक का इंतज़ार खत्म हुआ. इस जहाज ने 2 मार्च को कतर के रास लाफान टर्मिनल से 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड किया था. मगर मध्य पूर्व में तनाव के कारण यह जहाज फारस की खाड़ी में फंस गया था। 

ये भी पढ़ें :  प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र से झलकी नए भारत की तस्वीर

दिशा जहाज पर कितना गैस
इसक तरह से ‘दिशा’ जहाज में 62,370 मीट्रिक टन LNG है. ‘दिशा’ उन शुरुआती भारतीय LNG कैरियर जहाजों में से एक है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है. इस कार्गो को भारत के सबसे बड़े LNG इंपोर्ट हब दहेज में स्टोर किया जाएगा और देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा। 

दिशा दिखाएगा रास्ता
दिशा का आना अपने आप में बड़ी खुशखबरी है. यह संकेत है कि अब भारत के जितने भी टैंकर और जहाज फंसे हैं, वो सब धीरे-धीरे भारत की ओर आ रहे हैं. इनमें कुछ एलपीजी टैंकर, कुछ ऑयल टैंकर और कुछ एलएनजी टैंकर हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हॉर्मुज बंद हो गया था. इसके चलते ज्यादातर जहाज इस रास्ते में फंस गए थे. उन्हें गुजरने नहीं दिया जा रहा था. इसके चलते भारत के भी दर्जनों जहाज फंसे थे. ऐसे में भारत के लिए यह पहली बड़ी गैस खेप मानी जा रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी। 

ये भी पढ़ें :  धार्मिक स्थलों के सर्वे पर फारूक अब्दुल्ला ने जताई आपत्ति, 'मैंने अल्लाह से कहा है की हमें मुश्किलों से निकाले'

भारत के लिए बड़ी खुशखबरी
होर्मुज बंद होने से भारत के लिए यह स्थिति चिंता की वजह बन गई थी. कारण कि भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. इसका रास्ता होर्मुज ही है. पिछले कुछ महीनों में सप्लाई कम होने के कारण भारत को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ी और कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई भी सीमित करनी पड़ी. हाालंकि, दिशा टैंकर का निकलना सामान्य स्थिति लौटने का संकेत जरूर है. दिशा टैंकर ने एक तरह से बाकी फंसे हुए जहाजों को एक नई दिशा दिखाई है. आने वाले समय में गैस और तेल की स्थित पहले की तरह नॉर्मल हो सकती है। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment