होर्मुज स्ट्रेट में जाम जैसी स्थिति, नए नियमों के बीच जहाजों की लंबी कतार

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान में हुई डील के बाद अब होर्मुज से जहाजों का निकलना शुरू हो गया है। हालांकि इतने ज्यादा जहाज कतार में थे कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई है। पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने जहाजों को बिना किसी असुविधा को होर्मुज से पास करवाने के लिए कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत जहाज की तरफ से कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करनी होगी। इसके बाद भी जहाज का संपर्क अथॉरिटी से लगातार बना रहना चाहिए। अगर इसमें किसी तरह की चूक होती है तो इसकी जिम्मेदारी जहाज के मालिक की होगी। पीजीएसए ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करने की सुविधा दी है।

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क्यों इतना अहम है होर्मुज?
बता दें कि होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। अमेरिका के हमले के बाद मार्च से ही यह सामान्य आवाजाही के लिए बंद था। बेहद कम जहाजों को यहां से निकलने की अनुमति दी जाती थी। इसके बाद भी जहाजों पर हमले का खतरा बना रहता था। इसी जलमार्ग से खाड़ी देशों के लगभग 80 फीसदी तेल और गैस का निर्यात होता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए यह मार्ग बेहद अहम है। भारत भी अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का करीब 40 फीसदी आयात इसी मार्ग से करता आ रहा है।

PGSA के मुताबिक ट्रांजिट ऐप्लिकेशन में यात्रा की पूरी जानकारी, रूट, संपर्क और शिप के बार में सारी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही इसे होर्मजु से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज के पास पहुंचने से पहले ही जहाजों को अपनी रिक्वेस्ट भेज देनी चाहिए। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और किसी भी तरह की दुर्घटना को टालने के लिए यह प्रक्रिया लागू की गई है। बता दें कि युद्ध के दौरान होर्मजु में भी माइन्स बिछा दी गई थीं। इसलिए दुर्घटना संभावित क्षेत्र से जहाजों को गुजरने नहीं दिया जा सकता।

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60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क
समझौते के मुताबिक 60 दिनों तक ईरान जहाजों को पास कराने के बदले किसी भी तरह का शुल्क वसूल नहीं करेगा। स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा, पर्यावरण संबंधित भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। रखरखाव संबंधित सारे खर्च ईरान की सरकार वहन करेगी।

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गुरुवार को होर्मुस से होकर कम से कम 25 जाहज निकले। वहीं अप्रैल महीने में 7 से 8 जहाज ही होर्मुज से पास हो पाए थे। अमेरिकी हमले के बाद होर्मुज से जहाजों का निकलना बेहद कम हो गया था। बता दें कि एक दिन पहले यानी शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू होने वाली थी। तब तक उधर इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष बढ़ने लगा और इजरायल ने लेबनान में एयरस्ट्राइक कर दी। इसके बाद शुक्रवार की वार्ता टाल दी गई और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड का दौरा भी रद्द कर दिया।

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