आईएफसी नर्सरी बनी किसानों की उम्मीद

रायपुर

गुणवत्तापूर्ण पौधों से बढ़ रही आय और आत्मनिर्भरता

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” के अंतर्गत जनपद पंचायत धमतरी द्वारा संचालित आईएफसी परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रही है। सद्भावना महिला संकुल स्तरीय संगठन, दोनर के सहयोग से संचालित आजीविका सेवा केंद्र (नर्सरी इकाई) आज किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए गुणवत्तापूर्ण पौधों का विश्वसनीय स्रोत बन चुकी है। इस पहल ने न केवल किसानों को समय पर स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराए हैं, बल्कि वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा दी है।

पहले किसानों को सब्जी एवं फलदार पौधों के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार समय पर पौधे उपलब्ध नहीं होने या निम्न गुणवत्ता के कारण उत्पादन प्रभावित होता था। आईएफसी नर्सरी की स्थापना के बाद यह स्थिति बदली है। अब स्थानीय स्तर पर ही प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार कर किसानों तक समय पर पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।

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नर्सरी इकाई में टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, करेला, मूनगा (सहजन), पपीता, कटहल, नारियल सहित विभिन्न सब्जी एवं फलदार पौधों की उन्नत पौध तैयार की जा रही है। इन पौधों का वितरण उत्पादक समूहों एवं क्लस्टरों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों के किसानों तक किया जाता है। इससे क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिला है और किसानों ने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना शुरू किया है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि नर्सरी का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, नियमित आय और उद्यमिता का अवसर प्राप्त हुआ है। समूह की महिलाएं पौध उत्पादन, देखरेख, विपणन और प्रबंधन जैसे कार्यों का सफलतापूर्वक संचालन कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।

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वर्तमान चरण में नर्सरी इकाई द्वारा 38,100 गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन एवं वितरण किया गया है, जिससे ₹1,15,150 की आय अर्जित हुई। यह उपलब्धि महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन, उत्पादक समूहों, आईएफसी एंकर तथा क्लस्टर टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

इस पहल से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ जैविक खेती, पोषण वाटिका, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित तकनीकों को भी बढ़ावा मिल रहा है। बेहतर गुणवत्ता के पौधों के कारण फसलों की वृद्धि, उत्पादन एवं आय में सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है।

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यह उल्लेखनीय पहल कलेक्टर  अबिनाश  मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  गजेंद्र सिंह ठाकुर, जिला परियोजना प्रबंधक (आजीविका)  अनुराग मिश्रा, जनपद पंचायत धमतरी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सु वर्षा रानी चिकन्जूरी तथा ब्लॉक परियोजना प्रबंधक  प्रेमचंद सिन्हा के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है।

  आईएफसी नर्सरी इकाई यह सिद्ध कर रही है कि यदि महिलाओं की सहभागिता, आधुनिक कृषि तकनीक और संस्थागत सहयोग का प्रभावी समन्वय हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। धमतरी की यह पहल आज अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है और ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में एक सफल शासकीय मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

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