साइबर अपराध रोकने को पुलिस की डिजिटल पेट्रोलिंग शुरू, ऑनलाइन ठगों पर नजर

लखनऊ
सड़क पर होने वाली नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की तर्ज पर अब साइबर स्पेस में भी डिजिटल पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई है। बढ़ते साइबर अपराधों, ऑनलाइन ठगी और इसके शिकार लोगों की रकम वापस दिलाने की चुनौती और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे फर्जी संदेशों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने जोन स्तर पर प्रशिक्षित नए साइबर कमांडो की तैनाती की है। साइबर पुलिस सुबह-शाम नियमित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी कर रही है तथा संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तत्काल संबंधित जिले की पुलिस और साइबर सेल को सूचना दे रही है।

साइबर अपराध से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, केवाईसी अपडेट, लोन, नौकरी और सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी के मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है। जनवरी से जून 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, गोरखपुर जिले में साइबर और अन्य थानों को मिलाकर कुल 101 साइबर मुकदमे दर्ज किए गए।

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इन मामलों में 109 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई और 73 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन करोड़ों रुपये की ठगी के मुकाबले बरामदगी बेहद कम रही। गोरखपुर जोन की बात करें तो इस अवधि में 143 केस दर्ज हुए और 42.64 करोड़ रुपये जालसाजों ने उड़ा दिया है। साइबर थाना पर दर्ज अपराध के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में छह माह के दौरान साइबर ठगी से करीब 36.73 करोड़ की रकम प्रभावित हुई। इसमें साइबर थाने के 21 मामलों में 4.78 करोड़, जबकि अन्य थानों के 80 मामलों में 31.95 करोड़ की ठगी दर्ज की गई। हालांकि पुलिस ने समय रहते कुछ खातों को फ्रीज कर करीब 63.26 लाख सुरक्षित कराए, लेकिन पीड़ितों को वास्तविक रूप से वापस मिल सकी राशि महज 4.68 लाख रुपये ही रही। इन्ही वजहों से अब अपराध के बाद कार्रवाई करने के बजाय निगरानी की रणनीति है।

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तत्काल अलर्ट जारी कर शुरू करेंगे कार्रवाई
डिजिटल पेट्रोलिंग के दौरान साइबर पुलिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध वेबसाइट, फर्जी लिंक, फिशिंग अभियान, ठगी से जुड़े संदेश, फर्जी प्रोफाइल और साइबर अपराधियों की सक्रियता पर नजर रख रहे हैं। जिम्मेदारों के मुताबिक, यदि किसी क्षेत्र विशेष को निशाना बनाकर ठगी की कोशिश या अफवाह फैलाने का प्रयास मिलता है, तो संबंधित पुलिस इकाई को तुरंत अलर्ट भेजा जाएगा। इसके आधार पर खातों को फ्रीज कराने, लिंक ब्लॉक कराने, लोगों को चेतावनी जारी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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