लाल सागर में उतरी भारतीय नौसेना! हूतियों के हमले का दिया जवाब, INS आदित्य-त्रिशूल एक्शन में

मुंबई 

लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अब साफ संकेत दे दिया है कि अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए वह किसी और पर निर्भर नहीं रहेगा. भारतीय नेवी ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को यहां से सुरक्षित एस्कॉर्ट किया है. कुछ दिनों पहले भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ था और वो डूब गया था. इसके बाद भारतीय नौसेना खुद मैदान में उतर गई है और हाई-रिस्क जोन में एक्टिव ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं. यमन के पास एक भारतीय जहाज पर हमले के बाद स्थिति अचानक बदल गई. यह सिर्फ एक घटना नहीं थी, बल्कि एक चेतावनी थी कि लाल सागर अब सुरक्षित वैकल्पिक रूट भी नहीं रहा। 

ये भी पढ़ें :  बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता, 22 नक्सलियों ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया

इसी के बाद भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे संवेदनशील जलडमरूमध्य में सीधे दखल देते हुए दो क्रूड ऑयल टैंकरों MT Compass और MT Thalatta को सुरक्षित बाहर निकाला. भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जैसे खतरनाक इलाके में दो तेल टैंकरों को अपनी सुरक्षा में बाहर निकाला. INS Trishul और INS Aditya ने 9 और 10 अगस्त को इन जहाजों को एस्कॉर्ट किया। 

क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक किया, तो सऊदी ने तेल बेचने के लिए लाल सागर का रास्ता चुना. क्योंकि वह पूर्व और पश्चिम दोनों तरफ से समुद्र से जुड़ा है. कई तेल टैंकरों ने इसी रूट को विकल्प के तौर पर चुना. लेकिन अब यहां भी ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों के हमले बढ़ने से यह रास्ता भी जोखिम में आ गया है. यानी दुनिया के दोनों बड़े तेल रूट होर्मुज और बाब-अल-मंदेब एक साथ अस्थिर हैं। 

ये भी पढ़ें :  पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र, जब तक सुधार नहीं करेगा सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी

हूती बने समुद्र के लिए नया खतरा
यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं. हालिया हमले में एक भारतीय झंडे वाला जहाज डूब गया, हालांकि सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के पीछे हूतियों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि समूह ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली. हूतियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के रेड सी पोर्ट्स के खिलाफ ‘ब्लॉकेड’ का ऐलान भी किया था, जिससे पूरे इलाके में असुरक्षा और बढ़ गई है। 

ये भी पढ़ें :  हरियाणा में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, '38 मिनट CCTV बंद कर EVM मशीनों में की गई धांधली': करण दलाल

भारत क्यों उतरा सीधे मैदान में?
भारतीय झंडे वाले जहाज के डूबने के बाद यह तय हो गया है कि अब ईरान-अमेरिका के जंग की आग हमारे घर तक पहुंच गई है. यही वजह है कि भारत को पहली बार इस तरह सीधे एस्कॉर्ट ऑपरेशन चलाना पड़ा है. अब तक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़े देशों या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भरोसा किया जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में वह व्यवस्था कमजोर पड़ती दिख रही है. भारत का यह कदम इसी बदलाव का संकेत है कि अब अपने जहाजों और ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा खुद करनी होगी। 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment