RSS को शाखा लगाने के लिए लेनी होगी सरकारी मंजूरी? कर्नाटक के नए बिल से गरमाई सियासत

बेंगलुरु 
 गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि कर्नाटक कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद एक बयान में प्रियांक खरगे ने कहा कि इस विधेयक का मकसद निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। माना जा रहा है कि यह कानून सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेव संघ को प्रभावित करेगा। प्रियांक खरगे बीते कई दिनों से साफ बयान दे रहे थे कि कर्नाटक में संघ को बैन किया जाएगा।

प्रियांक खरगे ने कहा कि यह विधेयक सरकारी जमीनों, इमारतों, खेल के मैदानों, पार्कों, सड़कों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा, संरक्षण और जिम्मेदारी से इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। साथ ही, यह इनके दुरुपयोग को रोकता है और जनहित व भलाई के लिए इनकी रक्षा करता है।

नए कानून पर क्या बोले प्रियांक खरगे
प्रियांक खरगे ने आगे कहा कि इस कानून का मकसद जवाबदेही सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है। इस अटकल पर कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को निशाना बनाने के लिए है प्रियांग खरगे ने कहा कि सरकार के मन में कोई खास संस्था नहीं है। मंत्री ने कहा कि हर कोई यह क्यों सोच रहा है कि यह किसी खास संस्था, संघ, संगठन, सोसाइटी, क्लब, यूनियन, सिंडिकेट या NGO पर रोक लगाने या उसे नियंत्रित करने के लिए है? मेरी समझ से बाहर है।

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मॉनसून सत्र में ही पेश हो सकता है विधेयक
कर्नाटक में मौजूदा मॉनसून सत्र में ही इस विधेयक को पेश किया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के अधीन इमारतों या परिसरों जैसे कि स्कूल, कॉलेज, खेल के मैदान, पार्क, सड़क या फिर जलाशयों के किनारे कोई भी सभा करने से पहले इजाजत लेनी होगी। राज्य के गृह मंत्रालय ने 18 अक्टूबर 2025 को ही यह आदेश जारी किया था। कानून बनने के बाद यह उसी आदेश की जगह ले लेगा।

पहले के आदेश के मुताबिक भी एक जगह पर 10 लोगों के इकट्ठा होने के लिए के लिए परमीशन लेना अिवार्य कर दिया गया था। हालांकि कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद सरकार ने पुराने आदेश को वापस लेने और उसकी जगह कानून लाने का फैसला किया है। इससे सरकार को सभाओं, जुलूस और सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर नियंत्रण हासिल हो जाएगा। ऐसे में आरएसएस को भी अपनी शाखाएं लगाने या फिर किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए इजाजत लेनी होगी।

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कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड ने कहा कि किसी भी संगठन को टारगेट करने के लिए यह कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों के रख-रखाव को ध्यान में रखते हुए यह कानून लगाया जा रहा है। कर्नाटक सरकार के इस कानून को लेकर बीजेपी ने अपना विरोध दर्ज करवाया है। ऐडवोकेट गिरीश ने कहा कि यह असंववैधानिक नियम है। यह संविधान का आर्टिकल 19 का उल्लंघन कर करता है।

इससे पहले कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों कॉलेजों औऱ अन्य स्थानों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग कीथी। उन्होंने कहा था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आरएसएस अपनी शाखाएँ चला रहा है। वे बच्चों के मन में नकारात्मक विचार भरते हैं।

क्या है कर्नाटक का नया कानून
अधिकारियों के अनुसार, विधेयक में कार्यक्रमों, बैठ इसमें सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं प्रस्तावित हैं। इसमें सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग या नुकसान की स्थिति में जुर्माने के प्रावधान भी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में कई जगहों पर सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों का इस्तेमाल बिना अनुमति के कार्यक्रमों, बैठकों और निजी कामों के लिए किया जा रहा था। इससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था और आम लोगों को दिक्कत हो रही थी। नए विधेयक में स्पष्ट प्रावधान होंगे कि कौन, कब और किस शर्त पर सरकारी परिसर का इस्तेमाल कर सकता है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और जिम्मेदारी तय की जाएगी। उल्लंघन करने पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।

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सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी एक समुदाय या संगठन के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि टैक्सपेयर के पैसे से बनी संपत्तियों का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से और जनहित में हो।

मोहन भागवत को प्रियांक खरगे ने लिखा था लेटर
2025 से ही खरगे RSS के सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल का विरोध करते रहे हैं और संगठन से औपचारिक रूप से पंजीकरण कराने की मांग करते रहे हैं। जून 2026 में, खरगे ने RSS को एक खुला पत्र लिखकर उसके कानूनी दर्जे, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर स्पष्टता मांगी थी, क्योंकि संगठन अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन भारत और विदेशों में 60,000 से ज्यादा शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है। उसकी सार्वजनिक जीवन में अहम मौजूदगी है और इसलिए उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।

 

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