यशवंत सिन्हा सालों बाद मोदी सरकार से हुए खुश, थपथपाई पीठ; चीन को लेकर कही बड़ी बात

हजारीबाग

पिछले कई सालों से नरेंद्र मोदी सरकार के कट्टर आलोचक रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने लंबे समय बाद केंद्र सरकार के किसी काम की तारीफ की है। यशवंत सिन्हा ने कई वजहें गिनाते हुए दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन को बहुत सफल बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने चीन के सामने खुलकर अपनी बातें रखीं, जिसकी वजह से शी जिनपिंग के नाराज होने की खबरें हैं।

गौरतलब है कि मोदी सरकार की नीतियों और कामकाज से नाराज होकर पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने अप्रैल 2018 में भाजपा से नाता तोड़ लिया था। बाद में वह टीएमसी का हिस्सा बने थे। लेकिन 2021 में विपक्षी एकता के लिए काम करने की बात कहते हुए ममता बनर्जी की पार्टी से भी अलग हो गए थे। 2022 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में वह विपक्षी दलों की ओर से उम्मीदवार बनाए गए थे, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। आईएएस रहने के बाद राजनीति में आए सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ताकतवर मंत्री रहे। वह देश के वित्त मंत्रालय के साथ विदेश मंत्रालय भी संभाल चुके हैं।

सफलता की तीन वजहें क्या गिनाईं
अब लंबे समय बाद उन्हें मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए किसी काम की तारीफ करते हुए देखा गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान सिन्हा ने ब्रिक्स सम्मेलन को सफल बताते हुए भारत की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने तीन वजहें गिनाते हुए कहा, ‘इसको सफल इसलिए माना जाएगा क्योंकि जितने राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण दिया गया था, वे सभी लोग आए। रूस से पुतिन आए, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आए, जिनको लेकर आशंका रहती थी कि आएंगे या नहीं, वह आए। यह पहली सफलता इसी को मानते हैं। दूसरी सफलता यह है कि मीटिंग होने के बाद कल शाम को साझा घोषणापत्र जारी हुआ। जब मई महीने में दिल्ली में विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई थी तो साझा बयान नहीं हो पाया क्योंकि इतने मतभेद थे। लेकिन इस बात हमको लगता है कि पदाधिकारियों ने कड़ी मशक्कत की और सर्वसम्मति से साझा बयान जारी हुआ। तीसरा- यह कि जब इस तरह के सम्मेलन होते हैं तो द्वीपक्षीय वार्ताएं होती हैं। सब लोगों के साथ द्वपीक्षीय बैठकें हुईं. सबसे महत्वपूर्ण शी जिनपिंग के साथ हुई।’

ये भी पढ़ें :  महिलाओं की तरह भूतपूर्व सैनिकों व दिव्यांगों को भी मिलेगा स्टाम्प शुल्क छूट का लाभ : मुख्यमंत्री

ईरान पर स्टैंड भी पसंद आया
पूर्व विदेश मंत्री ने ईरान को लेकर भारत के स्टैंड को भी पसंद किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का स्टैंड बदलता हुआ दिखा था, लेकिन अब पुराने रुख पर आ गए हैं। उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स में ईरान के राष्ट्रपति आए। इतने महत्वपूर्ण लोगों के बीच में होने के बावजूद उनका काफी प्रभाव देखने को मिला इस सम्मेलन में जो मैं मानता हूं कि बहुत अच्छी बात है। जब इजरायल और अमेरिका का ईरान पर हमला हुआ था तो भारत थोड़ा अलग दिख रहा था। जब उनके सर्वोच्च नेता मारे गए तो भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई थी। उन सब बातों को देखकर मुझे लगता है कि ईरान के राष्ट्रपति का आना और बहुत भागीदारी निभाना, इसमें हम लोगों की जो परंपरागत पोजिशन रही है फिलिस्तीन और इजरायल को लेकर, वह लगा कि मोदी जी के 12 साल में उससे अलग हट रहे हैं। लेकिन इस सम्मेलन को हमें उसी स्टैंड पर लाया। इजरायल जो गाजा, लैबनान में कर रहा है उसकी आलोचना की गई है। यह संतोष का विषय है।’

ये भी पढ़ें :  BJP अध्यक्ष पद की उलटी गिनती शुरू: 4 दिग्गज नेता रेस में, जल्द होगा ऐलान

यशवंत सिन्हा बोले- चीन के साथ मजबूती से उठाए मुद्दे
इससे पहले कई बात मोदी सरकार की विदेश नीतियों की आलोचना कर चुके यशवंत सिन्हा ने कहा है कि भारत ने चीन के सामने अपने मुद्दों को मजबूती से उठाया और इस वजह से शी जिनपिंग नाराज तक हो गए। उन्होंने कहा, ‘जहां तक द्वीपक्षीय बैठकों का मामला है, जबसे महत्वपूर्ण था जो चीन के साथ हुई। मेरा मानना है कि हम चीन पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। चीन ने बराबर भारत को परेशान किया है, खंजर खोंपा है। इसलिए बातचीत हो, पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जो खबरें आ रही हैं द्वीपक्षीय बातचीत में भारत ने मजबूती से अपने मुद्दे उठाए। चीन के जो मुद्दे थे उनको भी उठाए। इसलिए शायद तल्खी आई, टेंशन हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि जो रात्रिभोज में जिनपिंग नहीं आए वह इसीलिए नहीं आए, क्योंकि वह खुश नहीं थे।’

ये भी पढ़ें :  राजस्थान पंचायत चुनाव: 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख, जयपुर-जोधपुर में पद अनारक्षित

सिन्हा ने भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा, ‘मोटामोटी मैं मानता हूं कि इसको देखने का जो नजरिया है कि कोई कह सकता है कि गिलास आधा भरा हुआ है या आधी खाली है। पूरे गिलास को देखिए। आधा भरा हुआ है और आधा खाली भी है, लेकिन भारत ने बहुत सफलता के साथ अपनी भूमिका निभाई, अध्यक्षता की। जो बहुत सारी चीजों को लेकर आशंकाएं थी, उसको इस भाषा में डाला कि सब लोग स्वीकार करें।’

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment