राजस्थान में बदलेगा हेल्थ सिस्टम, छोटे शहरों तक पहुंचेगी आधुनिक चिकित्सा

 जयपुर
 राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार अब केवल नए अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का फोकस ऐसा एकीकृत स्वास्थ्य तंत्र विकसित करने पर है, जिसमें छोटे शहरों और क्षेत्रीय केन्द्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल हेल्थ की सुविधा पहुंच सके। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था के केंद्र में मरीज और उसका कल्याण होना चाहिए। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा।
मुख्य सचिव जयपुर में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन-2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ‘अगले दशक के लिए राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण’ विषय पर राज्य की भावी स्वास्थ्य कार्ययोजना साझा की।

जयपुर से आगे बढ़ेगी आधुनिक चिकित्सा की पहुंच
श्रीनिवास ने कहा कि उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल जयपुर और बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। क्षेत्रीय केन्द्रों और छोटे शहरों में अस्पतालों के साथ विशेषज्ञ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जांच सुविधाएं, आपातकालीन सेवाएं और मजबूत रेफरल सिस्टम विकसित करना जरूरी है। इससे गंभीर बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। साथ ही छोटे शहरों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।

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उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक पहुंच, सार्वजनिक वित्त पोषण और नीतिगत दिशा देती है, जबकि निजी क्षेत्र निवेश, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ सेवाओं और नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दोनों क्षेत्रों को मरीजों के हित में साझेदार के रूप में काम करना होगा।

अस्पतालों की संख्या के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के साथ होना चाहिए। संक्रमण नियंत्रण, पारदर्शी उपचार परिणाम, चिकित्सकीय जवाबदेही और निरंतर गुणवत्ता सुधार को अस्पतालों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।

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उन्होंने कहा कि अस्पतालों की इमारत और उपकरण अपेक्षाकृत कम समय में तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन कुशल डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और स्वास्थ्य प्रबंधक तैयार करने में लंबा समय लगता है। इसलिए अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और सतत चिकित्सा शिक्षा पर जोर देना होगा।

डिजिटल हेल्थ में राजस्थान की मजबूत मौजूदगी
श्रीनिवास ने बताया कि राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 8.37 करोड़ विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता पंजीकरण में राजस्थान देश में दूसरे, स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण में पांचवें और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता पहचान संख्या के सृजन में चौथे स्थान पर है।

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उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य का अगला चरण उपलब्ध आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल और विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय है। इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड से मरीजों को निर्बाध उपचार सुविधा मिलेगी और डॉक्टरों को मरीज की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बेहतर तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल चिकित्सा और प्रशासनिक निर्णयों में सहायक हो सकता है, लेकिन मानवीय निगरानी और मरीज की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा, आतिथ्य सुविधाओं और प्रतिस्पर्धी लागत के कारण राजस्थान में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर्यटन का बड़ा केन्द्र बनने की संभावनाएं हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र आने वाले समय में राज्य में निवेश, रोजगार और कौशल विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

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