जैसलमेर की बदलेगी अर्थव्यवस्था, रेल-रोड और सोलर प्रोजेक्ट से थार को नई रफ्तार

जैसलमेर
थार की अर्थव्यवस्था अब केवल किले, रेगिस्तान और पर्यटन तक सीमित नहीं है। रेल नेटवर्क का विस्तार, सीमा तक मजबूत होती सड़कें, बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं और बिजली निकासी का ढांचा जैसलमेर की आर्थिक भूमिका को नया आकार दे रहा है। जैसलमेर पर्यटन केंद्र के साथ परिवहन, ऊर्जा और सीमा कनेक्टिविटी के बड़े क्षेत्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन रहा है।

रेल : पर्यटन केंद्र से परिवहन नेटवर्क तक
जैसलमेर रेलवे स्टेशन का करीब 140 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्विकास पूरा हो चुका है। स्टेशन पर 36 मीटर चौड़ा एयर कॉनकोर्स, छह मीटर चौड़ा ऊपरी पैदल पुल, पार्किंग, प्लेटफॉर्म शेल्टर, लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। करीब 67 करोड़ रुपए के कोच केयर कॉम्प्लेक्स का भी शुभारंभ हो चुका है। रेल मंत्रालय के अनुसार इससे ट्रेनों की रखरखाव क्षमता बढ़ेगी और अधिक ट्रेनों के संचालन में मदद मिलेगी।

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साबरमती-जोधपुर एक्सप्रेस का जैसलमेर तक विस्तार किया गया और 23 मई 2026 से साबरमती-जैसलमेर दैनिक सुपरफास्ट सेवा शुरू हुई। वहीं रामदेवरा-पोकरण के बीच 13.38 किलोमीटर नई रेल लाइन की स्वीकृत लागत 189.21 करोड़ रुपए है और परियोजना की लक्ष्य तिथि मार्च 2028 है। यह रामदेवरा-पोकरण क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली नई कड़ी है।

ऊर्जा : थार की जमीन से बड़े बिजली बाजार तक
जैसलमेर-पोकरण क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा विस्तार आर्थिक बदलाव का दूसरा बड़ा आधार है। राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार फलोदी-पोकरण सोलर पार्क की कुल क्षमता 750 मेगावाट है, जिसमें 450 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। फतेहगढ़ फेज-1बी की क्षमता 1,500 मेगावाट है, जिसमें 1,496 मेगावाट कमीशन हो चुकी है। इस तरह दोनों परियोजनाओं की कुल परियोजना क्षमता 2,250 मेगावाट और कमीशन क्षमता 1,946 मेगावाट है।

बिजली उत्पादन के साथ उसे ग्रिड तक पहुंचाने का ढांचा भी महत्वपूर्ण है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के दस्तावेज में राजस्थान अक्षय ऊर्जा क्षेत्र फेज-4 के 5.5 गीगावाट जैसलमेर-बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से बिजली निकासी से जुड़ी ट्रांसमिशन व्यवस्था दर्ज है। इसलिए 5.5 गीगावाट को ट्रांसमिशन क्षमता कहना सही नहीं होगा; यह इतनी अक्षय ऊर्जा की निकासी से जुड़ी व्यवस्था है।

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सीमा : रणनीतिक सड़क से आर्थिक कनेक्टिविटी तक
म्याजलार-जैसलमेर और सुंदर-म्याजलार-अंबासिंह की ढाणी मार्ग के 134 किलोमीटर हिस्से के दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन की आधारशिला रखी गई है। वहीं तनोट-रामगढ़-जैसलमेर और मोकल-सरकारितला मार्ग के 191 किलोमीटर हिस्से का दो-लेन पेव्ड-शोल्डर उन्नयन पूरा हो चुका है। एनएचएआई के अनुसार इन परियोजनाओं से सीमा तक रक्षा पहुंच मजबूत होने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और परिवहन में भी सुधार होगा।

असली सवाल : जैसलमेर की अर्थव्यवस्था में कितना पैसा रहेगा?
बड़े प्रोजेक्ट आर्थिक बदलाव की शुरुआत हैं, अंतिम परिणाम नहीं। असली असर तब दिखेगा, जब निर्माण और संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार, परिवहन कारोबार को काम, होटल-रेस्तरां को ग्राहक, मरम्मत-आपूर्ति कारोबार को बाजार और छोटे उद्यमों को नई मांग मिले।

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बेहतर रेल पहुंच पर्यटन कारोबार का दायरा बढ़ा सकती है। ऊर्जा परियोजनाएं तकनीकी सेवाओं, रखरखाव और आपूर्ति क्षेत्र में अवसर बना सकती हैं। सीमा सड़कें परिवहन और लॉजिस्टिक्स को गति दे सकती हैं। इन तीनों का साझा असर जैसलमेर की अर्थव्यवस्था को पर्यटन से आगे ले जाने की क्षमता रखता है।

विकास का दूसरा गणित : पानी, जमीन और पर्यावरण
विस्तार के साथ चुनौतियां भी बढ़ेंगी। ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि, बिजली निकासी के लिए मजबूत ग्रिड और संचालन के लिए कुशल मानव संसाधन जरूरी होंगे। पर्यटन और शहरी गतिविधियां बढ़ने पर पानी, कचरा प्रबंधन और विरासत संरक्षण का दबाव भी बढ़ सकता है।

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