प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2,400 करोड़ रुपये की लागत से बनी रणनीतिक जेड-मोड़ सुरंग का उद्घाटन 13 जनवरी को करेंगे

गांदरबल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 जनवरी को श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 2,400 करोड़ रुपये की लागत से बनी रणनीतिक जेड-मोड़ सुरंग (Z-Morh tunnel) का उद्घाटन कर सकते हैं। यह 6.5 किलोमीटर लंबी सुरंग लद्दाख क्षेत्र को पूरे साल सड़क मार्ग से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह वही सुरंग है जहां पिछले साल 20 अक्टूबर को आतंकी हमला हुआ था। यह सुरंग गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में आती है। गगनगीर में हुए हमले में एक स्थानीय डॉक्टर और बिहार के दो मजदूरों सहित सात लोगों की जान चली गई थी। जेड-मोड़ सुरंग निर्माण स्थल पर हुए इस हमले में दो आतंकवादी शामिल थे।

ये भी पढ़ें :  राजस्थान में खाटूश्याम से लौट रहे श्रद्धालुओं की दर्दनाक सड़क दुर्घटना, 11 की मौत

रक्षा जरूरतों और लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिहाज से यह सुरंग अत्यंत महत्वपूर्ण है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो प्रधानमंत्री खुद वहां मौजूद रहकर सुरंग का उद्घाटन करेंगे। लेकिन अगर खराब मौसम रहा तो इस स्थिति में सुरंग का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस सुरंग परियोजना का नाम लिए बिना सोशल मीडिया पर इसे पर्यटन के विस्तार के लिए एक "गेम चेंजर" बताया। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर, विशेष रूप से मध्य कश्मीर, आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के उद्घाटन की प्रतीक्षा कर रहा है। यह परियोजना घाटी में सर्दी के पर्यटन के विस्तार के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगी।"

ये भी पढ़ें :  Maharashtra Bus Accident : महाराष्ट्र के बुलढाणा में भीषण बस हादसा, 25 लोगों की मौत

गौरतलब है कि कंगन के गंड क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण श्रीनगर-सोनमर्ग सड़क सर्दियों के महीनों में बंद रहती है। जेड-मोड़ सुरंग के खुलने से यह सड़क सालभर खुली रहेगी, जिससे सोनमर्ग क्षेत्र में सर्दी के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। श्रीनगर-लेह सड़क को सालभर चालू रखने के लिए जोजिला सुरंग पर भी काम जारी है। जेड-मोड़ सुरंग परियोजना का काम मई 2015 में शुरू हुआ था और इसे पिछले साल पूरा कर लिया गया। फरवरी 2024 में सुरंग का सॉफ्ट ओपनिंग किया गया था। सुरंग के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह बर्फीले इलाकों में खतरनाक और हिमस्खलन-प्रवण मार्ग का विकल्प भी प्रदान करेगी।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment