धर्मशाला सनातन धर्म और सामाजिक परंपराओं का प्रतीक है धर्मशालाएँ: मंत्री श्रीमती गौर

भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि सामाजिक सहयोग से तैयार धर्मशालाएं मात्र ईंट गारे का भवन नहीं है, ये सनातन धर्म, परंपराओं, आराध्य भगवान कृष्ण के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रमुख केन्द्र भी है। राज्य मंत्री श्रीमती गौर रविवार को सीहोर के ग्राम सावंतखेड़ी (लक्ष्मीपुर) आष्टा में यादव अहीर समाज धर्मशाला के लोकार्पण एवं जीर्णोद्धार कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

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राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि यादव समाज के सामाजिक बंधुओं ने एक संकल्प लेकर समाज की धर्मशाला के निर्माण कार्य को समय पर पूरा किया। धर्मशाला का निर्माण और सामाजिक बंधुओं के योगदान के संगम से यह मिशन पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में अपनी सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने और हमारी नई पीढ़ी को सनातन धर्म, संस्कृति और हमारी परंपराओं से परिचित कराने और आत्मसात कराने की दृष्टि से धर्मशालाओं का निर्माण किया जाता था। ग्राम सावंतखेड़ी में भी उसी परंपरा का निर्वाह देखने को मिला है, जिसके लिए मैं अपने सामाजिक बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

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इस दौरान आष्टा के विधायक गोपाल सिंह, अध्यक्ष जिला पंचायक सीहोर श्रीमती रचना डॉ. सुरेंद्र सिंह मेवाड़ा, जीवन सिंह मण्डलोई, श्रीमती दीक्षा सोनु गुणवान, सीताराम यादव, श्रीमती सीमा महेश चौधरी, धारासिंह पटेल, श्रीमती हेमकुंवर रायसिंह मेवाड़ा, सुनील आर्य, सुनील प्रताप, अतुल शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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