बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस अधिकारी के पास राज्य की ओर से मिली संस्थागत शक्ति होती है और वह वर्चस्व की स्थिति में रहता है। ऐसे में पीड़िता की सहमति को सामान्य अर्थ में स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह कानूनी कार्रवाई के भय या दबाव में भी संबंध के लिए सहमत हो सकती है। इस टिप्पणी के साथ जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने आदिवासी विधवा महिला से दुष्कर्म के आरोपित आरक्षक रूद्रमणी यादव की…
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