75 की उम्र में भी कायम है रजनीकांत का जलवा, जानिए क्यों बरकरार है थलाइवा का स्टारडम

जब भी रजनीकांत पर्दे पर आते हैं, सिनेमाघर महज थिएटर नहीं रहते, बल्कि किसी बड़े स्टेडियम में तब्दील हो जाते हैं. लोग वहां सिर्फ किसी स्टार की झलक पाने के लिए नहीं पहुंचते, बल्कि उस शख्सियत में अपना संघर्ष, अपनी उम्मीदें और अपनी जीत तलाशते हैं. क्योंकि वो हम ही जैसे दिखते हैं, बोलते हैं. गिरते हैं, संभलते हैं, लेकिन हर ठोकर के बाद और भी ज्यादा शान से खड़े हो जाते हैं. साल 1975 की 'अपूर्वा रागांगल' से लेकर 'जेलर 2' तक रजनीकांत ने साबित कर दिया है कि…

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