स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बीसी सखी बनीं, बदली किस्मत और परिवार की स्थिति

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका अभियानों का प्रभाव अब गांव-गांव में दिखाई देने लगा है। बरेली जनपद के विकास खण्ड बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत उडला जागीर की निवासी सलमा इसकी प्रेरक मिसाल हैं। उनके जीवन में कभी आर्थिक तंगी और बेरोजगारी की चिंता थी, आज सलमा आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई पहचान बन चुकी हैं।

सलमा ने बीए की पढ़ाई पूरी की इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार का था। परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन हैं। उनके पिता ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आय सीमित थी और खर्च अधिक। बड़ी मुश्किल से भरण-पोषण होता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब नौकरी नहीं मिली तो सलमा निराश और चिंतित रहने लगीं। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उनकी माता को ब्लॉक स्तर से बीसी सखी बनने की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह पहल की थी। सलमा ने अवसर को पहचाना और 14 सितंबर 2021 को समूह से जुड़कर आवेदन किया। छह दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया और परीक्षा उत्तीर्ण कर बीसी सखी के रूप में चयनित हुईं।

ये भी पढ़ें :  चंदौली में जल प्रलय का कहर: सड़कों पर पानी, घर ढहे, सैकड़ों एकड़ फसल डूबी

कार्य प्रारंभ करने के लिए उन्हें 75,000 रुपये का सपोर्ट फंड मिला। इसके बाद आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने गांव में ही बीसी सखी सेंटर की स्थापना की। अब वह प्रतिमाह लगभग 35,000 रुपये तक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। जो परिवार कभी आर्थिक संकट से जूझ रहा था,  उसमें अब स्थिर आय और आत्मविश्वास है। सलमा न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि घर की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं।

ये भी पढ़ें :  शरीर पर देवी-देवताओं के टैटू बनवाने वालों के लिए वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद ने कही बड़ी बात, ऐसा करना अपराध की श्रेणी

उनके सेंटर पर अब गांव के लोग पैसे जमा करने और निकालने आते हैं। पहले जहां ग्रामीणों को बैंक की लंबी कतारों में लगना पड़ता था, अब उन्हें गांव में ही सहज और त्वरित बैंकिंग सुविधा मिल रही है। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सलमा ने जागरूकता शिविर भी लगाए। वे ग्रामीणों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली, पेंशन, बीमा और अन्य योजनाओं की जानकारी दे रहीं हैं। वह अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में लोगों का पंजीकरण भी कराती हैं। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक वह ग्राम पंचायत में वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। उनके प्रयासों से न केवल गांव में डिजिटल सशक्तीकरण बढ़ा है, बल्कि महिलाओं में बचत और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी आई है।

ये भी पढ़ें :  लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो के लिए बड़े फैसले, नए ऑटो-टेम्पो रूट और पार्किंग से बढ़ेगी सुविधा

सलमा की कहानी उत्तर प्रदेश सरकार की उस सोच को साकार करती है जिसमें महिलाओं को परिवर्तन का भागीदार बनाया जा रहा है। सलमा को अपने संघर्ष पर नहीं, अपनी सफलता पर गर्व है। उनकी पहचान अब एक बेरोजगार युवती की नहीं, बल्कि एक सशक्त बैंक सखी और आत्मनिर्भर महिला की है। यह कहानी दर्शाती है कि सही नीति, सही दिशा और दृढ़ संकल्प मिल जाए तो गांव की बेटी भी विकास की नई इबारत लिख सकती है।

Share

Leave a Comment