सीएम भजनलाल का बड़ा फैसला, टॉप IAS अफसरों की ‘कॉल सेंटर’ पर लगाई ड्यूटी

जयपुर.

राजस्थान में जनसुनवाई के तरीके को पूरी तरह बदलते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के 35 सीनियर IAS अधिकारियों को मैदान में उतारा है। अब Secretary से लेकर Additional Chief Secretary (ACS) रैंक के अधिकारी सचिवालय स्थित राजस्थान संपर्क कॉल सेंटर 181 पर तैनात रहेंगे। ये अधिकारी न केवल कॉल रिसीव करेंगे, बल्कि सीधे जनता की समस्याएं सुनकर मौके पर ही उनके समाधान के निर्देश देंगे।

35 सीनियर अफसर और '10 कॉल' का फॉर्मूला
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इसके आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
ड्यूटी रोस्टर: 35 वरिष्ठ अधिकारियों की अलग-अलग दिन ड्यूटी लगाई गई है।
अनिवार्यता: हर अधिकारी को अपनी शिफ्ट के दौरान कम से कम 10 कॉल रिसीव करने होंगे।
फीडबैक: अधिकारी न केवल नई शिकायतें सुनेंगे, बल्कि पोर्टल पर लंबित पुरानी शिकायतों के समाधान की भी व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करेंगे।

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4 मार्च से शुरू होगा विशेष अभियान
यह विशेष पहल 4 मार्च 2026 से शुरू होकर 28 मई 2026 तक एक अभियान के रूप में चलेगी। इस दौरान अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि संपर्क पोर्टल पर जो शिकायतें लंबे समय से अटकी हुई हैं, उनका निपटारा तुरंत हो।
ACS कुलदीप रांका, संदीप वर्मा, अभय कुमार, शिखर अग्रवाल और अपर्णा अरोड़ा जैसे बड़े नाम भी इस ड्यूटी रोस्टर में शामिल हैं।

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मुख्यमंत्री का 'सरप्राइज इंस्पेक्शन' बना प्रेरणा
पिछले कुछ हफ्तों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद सचिवालय स्थित 181 कॉल सेंटर के कई औचक निरीक्षण किए थे। एक बार तो उन्होंने खुद हेडफोन लगाकर शिकायतकर्ता से बात की और उसे त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब बड़े अधिकारी सीधे जनता से बात करेंगे, तो निचले स्तर का प्रशासन अधिक मुस्तैदी और पारदर्शिता से काम करेगा।

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सुशासन का नया अध्याय
इस फैसले के पीछे सरकार की मंशा 'पब्लिक फर्स्ट' (Public First) की नीति को लागू करना है।
जवाबदेही: अब कलेक्टर और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को पता होगा कि उनकी फाइलें कभी भी ऊपर बैठे सीनियर अधिकारियों की नजर में आ सकती हैं।
संवाद: जनता को यह महसूस होगा कि उनकी आवाज सीधे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुँच रही है।

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