अपहरण और ठगी का बड़ा खेल: नकली नोट गैंग का भंडाफोड़, आरोपी फरार

अमरोहा

यूपी के अमरोहा में रजबपुर पुलिस ने रविवार रात कालाखेड़ा के जंगल में हुई मुठभेड़ के बाद तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके कब्जे से दो दिन पूर्व अगवा किए गए युवक दीपांशु को सकुशल बरामद किया है। घेराबंदी के दौरान बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गए।

पकड़े गए बदमाशों ने युवक को असली नोटों के बदले तीन गुना नकली करेंसी देने के जाल में फंसाकर अगवा किया था और परिजनों से पांच लाख रुपये की फिरौती मांग रहे थे। एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि शनिवार शाम रजबपुर क्षेत्र से मुस्तफापुर नवादा निवासी दीपांशु का अपहरण हुआ था। रविवार रात पुलिस को आरोपियों की लोकेशन कालाखेड़ा के जंगल में मिली। पुलिस की जवाबी फायरिंग में विजेंद्र सिंह प्रजापति और धर्मेंद्र घायल हो गए, जबकि उनके तीसरे साथी योगेश पाल को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। गिरोह का चौथा सदस्य झम्मन फरार है।

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पुलिस ने मौके से घटना में प्रयुक्त कार, दो तमंचे और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में अपहरण की जो वजह सामने आई वह चौंकाने वाली है। मुख्य आरोपी धर्मेंद्र ने दीपांशु को झांसा दिया था कि उसके पास ऐसे नकली नोट हैं जिन्हें बाजार में कोई नहीं पकड़ सकता। यकीन दिलाने के लिए उसने दीपांशु को 500-500 के तीन असली नोट दिए और उन्हें नकली बताया। शनिवार को धर्मेंद्र ने उसे एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देने का लालच देकर रजबपुर बुलाया और वहीं से उसे अगवा कर लिया।

अपहरण के बाद रात भर पी शराब दो गाड़ियां बदलकर घूमते रहे
अपहरण के बाद बदमाश दीपांशु को लेकर रातभर घूमते रहे। पुलिस को चकमा देने के लिए उन्होंने रास्ते में गाड़ी बदली और बोलेरो की जगह फ्रोंक्स कार का इस्तेमाल किया। आरोपियों के पास नकदी खत्म हुई तो उन्होंने दीपांशु के गाजियाबाद निवासी दोस्त को डरा-धमकाकर पांच हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने इन पैसों से रातभर शराब पी और उसका भुगतान दीपांशु के ही मोबाइल से किया। फिलहाल पुलिस फरार चौथे आरोपी की तलाश में दबिश दे रही है।

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बरेली और बिजनौर के लोग बन चुके थे शिकार
मुठभेड़ में गिरफ्तार तीन बदमाशों का फिलहाल कोई अपराधिक रिकार्ड सामने नहीं आया है हालांकि पूछताछ के दौरान तीनों ने इसके पहले बरेली व बिजनौर में दो-तीन युवाओं से एक-दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करना स्वीकार किया है। पुलिस के मुताबिक नकली नोटों का लालच देकर ये गिरोह युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। रकम लेने के बाद नकली नोट देने के लिए समय ले लेते थे और बाद में पूरी रकम हड़प कर लेते थे। क्योंकि, मामला नकली नोटों से जुड़ा होता था लिहाजा पीड़ित शिकायत लेकर पुलिस तक जाने में झिझकते थे। इसी बीच इन लोगों ने अब दिपांशु को अपना शिकार बनाने का प्रयास किया लेकिन उसने एक लाख रुपये देने से पहले तीन लाख रुपये मांग लिए। इसी जिद पर बात बिगड़ गई।

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करीब 15 मिनट तक चली बहस के बाद बोलेरो सवार लोगों ने पैसे हड़पने के लिए दिपांशु को अगवा कर लिया। बताया जा रहा है कि फरार आरोपी झम्मन गाजियाबाद में ठेकेदारी करता है। इस काम को अंजाम देने के लिए धर्मेंद्र ने उसकी बोलेरो ली थी लेकिन दिपांशु के अपहरण के बाद जब काफी देर तक फिरौती मिलने की बात नहीं बनी तो झम्मन भांप गया कि पुलिस उनके पीछे पड़ चुकी है लिहाजा मां की तबियत खराब होने का बहाना किया और अपनी बोलेरो ले गया।

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