EPFO की बड़ी लापरवाही: 10 साल तक PF ट्रांसफर नहीं किया, अब देना होगा 50 हजार रुपये हर्जाना

चंडीगढ़

क्या कोई 10 तक सॉफ्टवेयर में खराबी का बहाना बनाकर पीएफ का पैसा लटकाए रह सकता है? मामला चंडीगढ़ का है। एक कर्मचारी ने सितंबर 2010 में कर्मचारी पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए अप्लाई किया, लेकिन उसका फंड ट्रांसफर नहीं किया गया। थक हारकर कर्मचारी ने उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया। आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया और मुकदमे का खर्च भी देने का आदेश दिया।

 खबर के मुताबिक चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) लगभग एक दशक की देरी के लिए सॉफ्टवेयर में खराबी को बहाना नहीं बना सकता।
क्या था मामला

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श्री गर्ग पुणे की कंपनी टेक महिंद्रा में काम करते थे। फरवरी 2009 में उन्होंने कंपनी छोड़ दी और जुलाई 2010 में इंफोसिस में जॉइन किया। सितंबर 2010 में उन्होंने टेक महिंद्रा वाले पुराने पीएफ खाते की रकम नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया। इसके बाद ईपीएफओ की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

श्री गर्ग ने आरटीआई भी दायर की। इसके बाद अप्रैल 2020 में जाकर ईपीएफओ ने सिर्फ 6.21 लाख रुपये ट्रांसफर किए, जबकि गर्ग के अनुसार उन्हें 11.07 लाख रुपये मिलने चाहिए थे। ईपीएफओ ने ब्याज न देने की वजह खाते को इनऑपरेटिव हो जाने और सॉफ्टवेयर तकनीकी खामियों को बताया।
ईपीएफओ को सॉफ्टवेयर की समस्या का बहाना नहीं चलेगा

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उपभोक्ता आयोग ने ईपीएफओ की इस दलील को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि सिर्फ मौखिक दावे करने और बिना ठोस सबूत के सॉफ्टवेयर की समस्या को लगभग दस साल की देरी का वैध कारण नहीं माना जा सकता। देरी की इतनी लंबी अवधि अपने आप में सेवा में कमी और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है।
सुनवाई के दौरान फंड ट्रांसफर, लेकिन…

हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ईपीएफओ ने गर्ग के खाते में अतिरिक्त 3.67 लाख रुपये और 64,841 रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन आयोग ने ईपीएफओ पर 50,000 रुपये का हर्जाना और मुकदमे का खर्च भी लगाया।

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आयोग ने साफ किया कि तकनीकी अड़चनों को देरी का सही कारण बताने के लिए ईपीएफओ को पर्याप्त दस्तावेज पेश करने चाहिए थे, जो उसने नहीं किए। यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर में लंबी देरी का सामना करना पड़ता है। आयोग ने ईपीएफओ को यह राशि 60 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया है, अन्यथा इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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