BLA का नया वीडियो: पाकिस्तानी सैनिकों की गुहार—‘हमें क्यों छोड़ दिया’, सामने आई बेबसी

इस्लामाबाद
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में पाकिस्तानी सैनिक हिरासत में नजर आ रहे हैं। वह पाकिस्तानी सरकार और सेना से अपनी जान बचाने लिए गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। इसमें सैनिक रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सर्कुलेट हो रहा है। गौरतलब है कि बीएलए ने दावा किया है कि उसने सात पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में ले रखा है। इन सैनिकों को छोड़ने के लिए समय सीमा भी तय की गई थी। हालांकि आलोचकों ने इस वीडियो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

किसने शेयर किया वीडियो
बलूचिस्तान क्षेत्र के इंडिपेंडेंट ऑनलाइन न्यूज पोर्टल बलूचिस्तान पोस्ट ने सोशल मीडिया पर यह वीडियो शेयर किया है। इसमें बीएलए के ऑफिशियल चैनल हक्काल का हवाला दिया गया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि कुछ लोग घुटनों के बल बैठे हुए हैं। उनके हाथों में एक कार्ड है। बताया जा रहा है कि यह पाकिस्तानी सैनिकों का ऑफिशियल सर्विस कार्ड और राष्ट्रीय पहचान पत्र है। वीडियो में यह लोग पाकिस्तानी अधिकारियों से अपने लिए अपील करते सुनाई दे रहे हैं।

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वीडियो में क्या
इन लोगों का दावा है कि उन्हें आधिकारिक ढंग से नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें सरकारी पहचान पत्र भी जारी किया गया और पोस्टिंग की गई। अब इन लोगों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि आखिर पाकिस्तानी सरकार उन्हें पहचानने से इनकार क्यों कर रही है। वीडियो में एक पाकिस्तानी सैनिक पाकिस्तानी सेना से मदद की गुहार लगाता नजर आ रहा है। वह कह रहा है कि पाकिस्तानी सेना यह कैसे कह सकती है कि हम उसके आदमी नहीं हैं। आखिर यह कार्ड किसका है। (वह एक आई कार्ड दिखाता है।) वह आगे कहता है कि यह आर्मी का नहीं है? इसके बाद वह कहता है कि ऊपरवाले का वास्ता है। मेरे पिता की हालत ठीक नहीं है और मैं घर का सबसे बड़ा हूं। यह कहकर अन्याय मत करो कि हम पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं।

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क्या है पूरा मामला
बता दें कि पहले बीएलए का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने उसके लोगों को कैद कर रखा है। इसके बाद उसने पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लेकर कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था। इसके लिए उसने सात दिन की समय-सीमा भी तय कर रखी थी। नए वीडियो में बीएलएल ने कहा है कि उसकी समय-सीमा में तीन दिन का समय अभी बचा है। ग्रुप ने इसे ऑपरेशन हीरोफ 2.0 का नाम दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं, सेना की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है।

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