दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से किनारा, तीसरी बार नहीं जाएंगे संसद के उच्च सदन में—क्या है कांग्रेस की अंदरूनी रणनीति?

भोपाल
2 बार राज्यसभा के सांसद रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार अपर हाउस में जाने से मना कर दिया है। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2026 में खत्म होने वाला है। एमपी में कांग्रेस विधायकों की संख्या को देखें तो वो आसानी से तीसरी बार राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा है- 'मैं अपनी सीट खाली कर रहा हूं।' दिग्विजय सिंह के ऐलान के बाद कई सवाल बन रहे हैं, जिनमें से दो की चर्चा तेजी से हो रही है। पहला- अगर दिग्विजय सिंह नहीं तो कौन जा रहा है राज्यसभा? दूसरा- क्या उनका राज्यसभा से मोहभंग हो गया है या फिर कांग्रेस में कोई सीक्रेट प्लान बन रहा है?
 
उनकी जगह कौन जा रहा है राज्यसभा?
उनकी जगह या फिर कौन राज्यसभा जा रहा है, इसका जवाब दिग्विजय सिंह ने गोल-मोल करते हुए दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान, जब उनसे पूछा गया- 'मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आपको पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्यसभा सीट से अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को भेजा जाना चाहिए'- इस पर आपका क्या कहना है? इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा- “ये मेरे हाथ में नहीं है।”

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कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति की तरफ इशारा
अब दूसरा सवाल उठ रहा है क्या दिग्विजय सिंह का मोहभंग हो गया है या कांग्रेस और राहुल गांधी कोई सीक्रेट प्लान पर काम कर रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह द्वारा अपना नाम पीछे खींच लेना 'व्यक्तिगत निर्णय नहीं' है। ये 'कांग्रेस आलाकमान की सोची समझी रणनीति' है बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस केवल सदन में सरकार को घेरने की बजाय धरातल पर अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में युवाओं को आगे लाने की तैयारी हो रही है। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी जा रही हैं।

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विधानसभा चुनाव की चल रही है तैयारी?
साल 2017-18 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में नर्मदा परिक्रमा का आयोजन किया गया था। ये परिक्रमा करीब 3300 किलोमीटर लंबी थी। इसे कांग्रेस के लिए मजबूती के तौर पर देखा गया था। जैसे राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के द्वारा कार्यकर्ताओं और लोगों पहुंच बनाई थी, ठीक ऐसा ही प्रभाव नर्मदा परिक्रमा का देखने को मिला था। इसका प्रभाव 2018 के एमपी विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार फिर दिग्विजय सिंह से कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान कराया जा सकता है। ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में संगठन और नए नेताओं को मजबूत दिशा दे सके।

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दिग्विजय सिंह की हार-जीत का सफर
आपको बताते चलें कि दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा नाम हैं। वो 1993 से 2003 तक लगातार 2 बार एमपी के सीएम रहे हैं। हालांकि 2003 में कांग्रेस की सत्ता गई तो उनकी राजनीति में विराम सा लग गया था। लेकिन एक दशक की शांति के बाद 2013 में उनकी फिर वापसी हुई और 2014 से राज्यसभा के सांसद हैं। इस बीच 2019 और 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

 

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