नेपाल चुनाव से पहले कूटनीतिक हलचल तेज: भारत या चीन, किसे मिलेगी प्राथमिकता?

नेपाल
नेपाल में बीते साल भ्रष्टाचार विरोधी जेन Z प्रदर्शनों और के पी शर्मा ओली की सरकार गिरने के करीब छह महीने बाद अगले सप्ताह आम चुनाव होने हैं। सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 5 मार्च को मतदान की घोषणा की थी, जिसके बाद देश में नई सरकार चुनी जाएगी। इस चुनाव पर भारत भी नजरें रख रहा है। भारत में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि नेपाल की नई चुनी हुई सरकार भारत और चीन के बीच तालमेल बैठा पाएगी। और अगर इसका जवाब ना है तो नई सरकार चीन और भारत में से किसे ज्यादा तवज्जो देगी? इस सवाल को लेकर जानकारों ने अपने मत रखे हैं। जानकारों का मानना है कि नेपाल में चाहे किसी की भी सरकार बने, वह भारत और चीन के बीच नेपाल की संतुलित नीति को ज्यादा नहीं बदलेगी।

ये भी पढ़ें :  समस्त छत्तीसगढ़ वासियों को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा आप सभी पर बनी रहे - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

इससे पहले नेपाल में मतदान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। चुनाव से पहले एक तरफ जहां युवा उम्मीदवार अर्थव्यवस्था में सुधार और पुरानी राजनीतिक जमात को हटाने का वादा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी नेता स्थिरता और सुरक्षा की बात कर रहे हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिल सकता है।

जारी रह सकती है गठबंधन की राजनीति
नेपाली पत्रकार सुधीर शर्मा के मुताबिक किसी एक पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत हासिल करना बहुत मुश्किल होगा, इसलिए गठबंधन की राजनीति जारी रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के भारत और चीन से रिश्ते इस बात पर निर्भर करेंगे कि गठबंधन कैसा होगा और उसमें कौन प्रमुख भूमिका में रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रिश्तों की बुनियाद नहीं बदलेगी, सिर्फ कुछ तरीके बदल सकते हैं।

ये भी पढ़ें :  अमेरिका के स्कॉन्सिन स्कूल में गोलीबारी से मरने वालों की संख्या दो हुई, छह छात्र अभी भी घायल

दोनों देशों से कैसे समीकरण?
रणनीतिक मायनों में देखा जाए तो भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह नेपाल के कुल आयात में 63 प्रतिशत यानी 8.6 अरब डॉलर की हिस्सेदारी रखता है। वहीं चीन 13 प्रतिशत यानी 1.8 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा भारत लंबे समय से बहुसंख्यक हिंदू नेपाल को पारंपरिक सहयोगी मानता है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। नेपाल दोनों देशों से बुनियादी ढांचे के जरिए भी जुड़ा है। कई जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए बिजली भारत को जाती है, जबकि चीन तिब्बत के रास्ते बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सड़क, रेलवे और हवाईअड्डों में निवेश कर रहा है।

ये भी पढ़ें :  MP Heavy Rain Alert : मध्‍य प्रदेश में भारी बारिश, इन जिलों में IMD ने जारी किया अलर्ट, जानिए अपने शहर के मौसम का हाल

संतुलन बनाने की कोशिश रहेगी जारी
दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के मुताबिक नेपाल की नेतृत्व व्यवस्था आमतौर पर भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है, भले ही कभी-कभी किसी एक की ओर झुकाव दिखे। उनका मानना है कि अगर युवा नेता सत्ता में आते हैं, तब भी भारत और चीन के साथ नीति में बड़ा अंतर नहीं आएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है और बड़े प्रोजेक्ट्स में अपारदर्शी फंडिंग को चुनौती दे सकती है। उनके अनुसार, युवा नेपालियों को ना तो चीन से खास दुश्मनी है और ना ही वे चाहते हैं कि कोई भी देश अपारदर्शी तरीके से नेपाल की राजनीति को प्रभावित करे।

Share

Leave a Comment