माओवाद से मातृत्व तक: सरकार की पहल से बदली आत्मसमर्पितों की जिंदगी, अब गूंजी किलकारियां

जगदलपुर

कभी जंगलों में बंदूक उठाने को मजबूर और जिंदगी के हर फैसले पर संगठन का पहरा, लेकिन अब वही चेहरे मुख्यधारा में लौटकर अपनी जिंदगी खुद लिख रहे हैं. बस्तर में आत्मसमर्पित माओवादियों की कहानी अब सिर्फ सरेंडर तक सीमित नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की कहानी बन चुकी है. जहां बंदिशें टूट रही हैं, और घर-परिवार के सपने पूरे हो रहे हैं.

माओवादी संगठन में शामिल होने के बाद इन लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती थी. हर कदम पर नियम हर फैसले पर पहरा. सबसे बड़ी बंदिश होती थी परिवार बसाने की मनाही. संगठन के भीतर रिश्ते बनाने और बच्चे पैदा करने पर सख्त रोक थी. यहां तक कि कई मामलों में जबरन नसबंदी तक कर दी जाती थी, यानि एक इंसान से उसकी सबसे बुनियादी इच्छाएं तक छीन ली जाती थी. न अपना घर… न अपने बच्चे… सिर्फ संगठन और उसकी विचारधारा.

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लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है मुख्यधारा में लौटे इन आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए सरकार की पुनर्वास नीति एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है सिर्फ हथियार छोड़ने तक ही सीमित नहीं, बल्कि इन्हें एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जीने का मौका दिया जा रहा है. इसी कड़ी में सबसे संवेदनशील पहल वैसक्टोमी रिवर्सल अब इनकी जिंदगी में नई रोशनी ला रही है. पिछले साल 56 पुनर्वासित माओवादियों का सफल ऑपरेशन किया गया, जिससे वे फिर से सामान्य पारिवारिक जीवन की ओर लौट सकें.

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इस पहल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. इन 56 में से 23 दंपतियों के घर अब बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं. जो कभी जंगलों में हथियार लेकर घूमते थे, आज वही लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर एक नई दुनिया बसा रहे हैं. यह सिर्फ एक व्यक्तिगत खुशी नहीं, बल्कि उस दर्दनाक अतीत से बाहर निकलने का संकेत है, जहां इंसान को उसकी इंसानियत से ही दूर कर दिया जाता था.

बस्तर में यह बदलाव एक बड़ी सामाजिक कहानी भी कह रहा है. जहां पहले डर, हिंसा और बंदिशों का माहौल था वहां अब भरोसा, परिवार और भविष्य की बात हो रही है. और यही वजह है कि हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले कई अन्य माओवादियों ने भी नसबंदी रिवर्सल के लिए आवेदन दिया है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि इनकी जिंदगी में भी खुशियों की वही शुरुआत हो जो अब कई घरों में दिखाई देने लगी है.

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आईजी बस्तर सुंदरराज पी. बताते हैं कि पुनर्वास के तहत हम हर संभव मदद दे रहे हैं कई माओवादियों ने वैसक्टोमी रिवर्सल के लिए आवेदन किया है स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर हम कोशिश कर रहे हैं कि वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकें.

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