ग्रहण के बाद घर की शुद्धि कैसे करें? मंदिर से किचन तक जानें सही नियम

पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है. हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भोजन आदि से परहेज किया जाता है. ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद घर, मंदिर और रसोई का शुद्धिकरण करना जरूरी माना गया है.आइए जानते हैं कि ग्रहण के बाद शुद्धिकरण कैसे किया जाता है और इसके क्या नियम हैं.

क्या है चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का संबंध राहु और केतु से जोड़ा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय राहु-केतु ने छल से अमृत पान किया था, जिसके बाद उनका सिर और धड़ अलग कर दिया गया. मान्यता है कि वही राहु-केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, जिससे ग्रहण लगता है. इसी कारण ग्रहण काल को नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है और इसके बाद शुद्धिकरण की परंपरा निभाई जाती है.

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मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें?
    ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहले घर के सभी सदस्य स्नान करें. गंगाजल मिले पानी से स्नान करना शुभ माना जाता है.
    मंदिर की सफाई करें यानी घर के मंदिर को साफ कपड़े से पोंछें.
    पूरे मंदिर और घर में गंगाजल छिड़कें.
    यदि संभव हो तो मूर्तियों को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराकर फिर से स्थापित करें.
    भगवान को ताजे फूल, नए वस्त्र और ताजा भोग अर्पित करें.
    शुद्धिकरण के बाद आरती और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है.

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किचन का शुद्धिकरण कैसे करें?
    ग्रहण के दौरान बना हुआ या रखा हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए.
    चूल्हा, गैस स्टोव, बर्तन आदि अच्छी तरह धो लें.
    ग्रहण के बाद ताजा और सात्विक भोजन बनाना चाहिए.
    मान्यता है कि ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी पत्र डालने से उसका प्रभाव कम होता है.

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पूरे घर का शुद्धिकरण
    घर में गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें.
    नमक मिले पानी से फर्श पोंछना भी शुभ माना जाता है.
    हवन या धूप-दीप जलाकर वातावरण को शुद्ध करें.

ग्रहण के बाद क्या करें?
    दान-पुण्य करें, विशेषकर अन्न, वस्त्र या धन का दान और गरीबों को भोजन कराना शुभ माना जाता है.
    भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करें.
    ग्रहण के बाद स्नान किए बिना पूजा न करें.

 

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