28 दिन वाला खेल! ‘मंथली प्लान’ के नाम पर साल में 13 बार रिचार्ज, संसद में उठा मुद्दा

नई दिल्ली
भारत में मोबाइल रीचार्ज प्लान्स को लेकर एक बड़े सच पर चर्चा तेज हो गई है। जिन प्लान्स को कंपनियां ‘मंथली प्लान’ कहकर बेचती हैं, वे असल में पूरे 30 दिन नहीं बल्कि सिर्फ 28 दिन तक ही चलते हैं। इस मुद्दे को हाल ही में संसद में राघव चड्ढा ने उठाया, जहां उन्होंने बताया कि यह सिस्टम सीधे-सीधे सब्सक्राइबर्स की जेब पर एक्सट्रा बोझ डालता है।

सांसद ने तर्क दिया कि 28 दिन का प्लान हर महीने 2-3 दिन कम पड़ जाता है। इस वजह से साल के 365 दिन पूरे करने के लिए यूजर्स को 12 की जगह 13 बार रीचार्ज करना पड़ता है। यानी बिना ध्यान दिए ही लोग हर साल एक एक्सट्रा रीचार्ज के पैसे चुका रहे हैं। यह मॉडल टेलिकॉम कंपनियों के लिए फायदे का सौदा है, लेकिन आम यूजर्स के लिए महंगा साबित होता है।

ये भी पढ़ें :  Flipkart का बड़ा ऑफर! अब खरीदारी करें आज, 30 दिन बाद करें पेमेंट; EMI की भी सुविधा

टेलिकॉम मंत्री ने दिया जवाब
मुद्दे पर जवाब देते हुए टेलिकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार इस स्थिति को जानती है और टेलिकॉम कंपनियों को 30 दिन वाले प्लान्स को ज्यादा प्रमोट करने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस दिशा में पहले ही नियम बनाए जा चुके हैं।

दरअसल, Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने 2022 में एक बड़ा नियम लागू किया था। इस नियम के तहत हर टेलिकॉम कंपनी को अपने प्रीपेड प्लान्स में कम से कम एक 30 दिन की वैलिडिटी वाला प्लान देना अनिवार्य किया गया। इसका मकसद यूजर्स को 28 दिन वाले प्लान्स के अलावा एक सही ‘मंथली’ विकल्प देना था, जिससे उन्हें बार-बार रिचार्ज करने की जरूरत ना पड़े।

ये भी पढ़ें :  187KM रेंज और डबल बैटरी की ताकत! Hero Vida EV स्कूटर के 3 लाख खरीदार, बिक्री में बड़ा रिकॉर्ड

ऑफर किए जा रहे हैं बेहद कम प्लान
हालांकि, हकीकत कुछ और ही है। Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी बड़ी कंपनियां 30 दिन वाले प्लान्स तो देती हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है। जियो के पास 2-3, एयरटेल के पास 2-4 और Vi के पास 2-3 प्लान ऐसे हैं, जो 30 दिनों की वैलिडिटी के साथ आते हैं। ज्यादातर प्लान्स आज भी 28 दिन की वैलिडिटी के साथ आते हैं। वहीं, Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) इस मामले में थोड़ा अलग नजर आता है, जहां करीब आधा दर्जन प्लान्स कैलेंडर मंथ के हिसाब से भी चलते हैं।

ये भी पढ़ें :  2000 KM रेंज और ब्रह्मोस से तेज, दिल्ली से बटन दबाने पर किराना हिल्स में मच जाएगी तबाही

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कंपनियों को ‘मंथली प्लान’ शब्द का इस्तेमाल करने की परमिशन होनी चाहिए, जब वे पूरे महीने की सेवा ही नहीं दे रही हैं। सब्सक्राइबर्स के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे रीचार्ज करते वक्त सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि वैलिडिटी पर भी ध्यान दें। अगर सरकार इस पर सख्ती दिखाती है, तो संभव है कि 30 दिन वाले प्लान्स की संख्या बढ़े और यूजर्स को राहत मिले।

 

Share

Leave a Comment