16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया की नो-एंट्री! इस राज्य में बैन पर सरकार कर रही मंथन

दावोस/अमरावती
आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह खुलासा राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान ब्लूमबर्ग से बातचीत में किया। नारा लोकेश ने कहा कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद कई तरह की सामग्री को सही तरीके से समझ नहीं पाते, जिससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को ऐसे प्लेटफॉर्म पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि वे किस तरह के कंटेंट के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में एक मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।”

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ऑस्ट्रेलिया के कानून से प्रेरणा
गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok, X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैपचैट जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो आंध्र प्रदेश भारत का पहला राज्य होगा, जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

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बच्चों की सुरक्षा ही मकसद
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली YSRCP सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और खासकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक व अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा, “कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन मौजूद नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए आंध्र सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है, खासकर ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून का।”

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इस कदम को सेंशरशिप ना समझें
हालांकि, दीपक रेड्डी ने यह भी साफ किया कि इस कदम को सरकारी निगरानी या सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “इसका उद्देश्य सिर्फ बच्चों को जहरीले कंटेंट, ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।” फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। आने वाले समय में यदि इसे लागू किया जाता है, तो यह डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।

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