चाइना के विदेश मंत्री से एनएसए अजीत डोभाल की मुलाकात, आतंकवाद के मुद्दे पर दिया सख्त मैसेज

नई दिल्ली

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात में सभी प्रकार के आतंकवाद का मुकाबला करने पर जोर दिया. यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई. दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की.

इस दौरान डोभाल ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आतंकवाद के हर रूप का मिलकर मुकाबला करना जरूरी है. इससे पहले दिसंबर 2024 में भी डोभाल और वांग ने बीजिंग में बैठक की थी.

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भारत और चीन एक बार फिर अपने संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है. इससे पहले भी विदेश सचिव स्तर की बैठकें हो चुकी हैं. दोनों देशों के बीच तनाव की वजह पूर्वी लद्दाख सीमा पर हुई झड़प थी.

आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करना जरूरी- डोभाल

विदेश मंत्रालय की तरफ से अपने बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रम की समीक्षा की और लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा संपर्क बढ़ाने सहित द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने की बात कही. एनएसए ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी प्रकार के आतंकवाद का डटकर मुकाबला करने की आवश्यकता पर भी बल दिया.

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डोभाल की तरफ से आतंकवाद का मुकाबला करने पर ऐसे वक्त जोर दिया है, जब लगभग डेढ़ महीने पहले भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था. NSA डोभाल ने यह भी कहा कि सीमा पर शांति बनाए रखना और आतंकवाद से कठोरता से निपटना जरूरी है.
क्या है इस बैठक का मकसद

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों देशों के नेताओं के बीच महत्वपूर्ण आम सहमति को लागू करने और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द पटरी पर लाने के लिए काम करने को तैयार है. भारत पहले भी कई बार बता चुका है कि अप्रैल 2020 की स्थिति पर लौटना ही समाधान की दिशा में पहला कदम होगा. इस बैठक का मकसद LAC विवाद को पूरी तरह सुलझाने और आपसी संबंध फिर से बहाल करना है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच संबंध को एक बार फिर मजबूत करना है.

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