पंकज त्रिपाठी और पत्नी मृदुला का सपना हुआ साकार, ‘लाइलाज’ 25वें भारत रंग महोत्सव (दिल्ली) के लिए चयनित

मुंबई,

 बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी और उनकी पत्नी मृदुला की पहली थिएटर प्रोडक्शन लाइलाज को भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित रंगमंच महोत्सव भारत रंग महोत्सव के लिए चुना गया है। यह महोत्सव नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी), दिल्ली द्वारा आयोजित किया जाता है। अपने 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका यह महोत्सव जनवरी के आखिरी हफ्ते से फरवरी तक आयोजित होगा, जिसमें भारत और दुनिया भर के प्रसिद्ध नाट्य मंचन शामिल होंगे।

लाइलाज एक म्यूज़िकल कॉमेडी नाटक है, जिसे फैज़ मोहम्मद खान ने लिखा और निर्देशित किया है। यह नाटक पंकज और मृदुला के थिएटर बैनर रूपकथा रंगमंच के तहत प्रस्तुत किया गया है। इस नाटक का खास महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पंकज त्रिपाठी की करीब एक दशक बाद रंगमंच पर वापसी को दर्शाता है। इसके साथ ही, उनकी बेटी आशी का इस नाटक से रंगमंच अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, जिससे यह नाटक पूरे परिवार के लिए बेहद खास बन जाता है। लाइलाज का भारत रंग महोत्सव में चयन रूपकथा रंगमंच के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह पहली बार है जब उनकी पहली प्रस्तुति को इतने बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह मिली है।

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पंकज त्रिपाठी ने कहा, “भारत रंग महोत्सव भारतीय रंगमंच की दुनिया में एक बहुत खास स्थान रखता है और इसके 25वें संस्करण में लाइलाज का चयन होना मेरे लिए बेहद विनम्र करने वाला अनुभव है। थिएटर ही मेरी जड़ें हैं और एनएसडी हमेशा अनुशासन, ईमानदारी और कला के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा है। रूपकथा रंगमंच की पहली प्रस्तुति को ऐसे मंच पर लाना मेरे लिए एक ‘फुल सर्कल’ पल जैसा है।
लाइलाज एक सरल, संगीत से भरी और दिल से जुड़ी कहानी है, जिसके पीछे कई लोगों की मेहनत और थिएटर के प्रति सच्चा विश्वास है। अपनी बेटी आशी के साथ इस मंच को साझा करना मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा। मैं इसे सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि उस थिएटर समुदाय को समर्पण मानता हूं जिसने मुझे गढ़ा है।”

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नाटक की सह-निर्माता मृदुला त्रिपाठी ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “जब हमने रूपकथा रंगमंच की शुरुआत की थी, तब हमारा मकसद कभी शोहरत या बड़े पैमाने की तलाश नहीं था, बल्कि ईमानदारी और गर्मजोशी से कहानियां कहना था। लाइलाज का भारत रंग महोत्सव जैसे बड़े मंच के लिए चुना जाना, वह भी इसके 25वें साल में, हमारे लिए बहुत। संतोषजनक है। यह नाटक प्यार, धैर्य और प्रक्रिया पर विश्वास के साथ तैयार किया गया है। इसे एनएसडी जैसे मंच तक पहुंचते देखना, जहां बेहतरीन थिएटर को सम्मान मिलता है, इस सफर को और भी खास बनाता है। माता-पिता के तौर पर आशी को ऐसे माहौल में मंच पर अपने पहले कदम रखते देखना हमारे लिए बेहद भावुक पल है। हम इस महोत्सव, दर्शकों और उन सभी कलाकारों के आभारी हैं जो आज भी मानते हैं कि थिएटर लोगों को छूने, जोड़ने और सुकून देने की ताकत रखता है।”

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