अलास्का से जीतकर लौटे पुतिन, ट्रंप खाली हाथ, अगला फोन किसे करेंगे?

वाशिंगटन 
दुनिया की निगाहें अलास्का की बहुप्रतीक्षित बैठक पर टिकी थीं। उसका नतीजा अब सभी के सामने है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन पर हमला जारी रहेगा और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई ठोस समझौता कराने में नाकाम रहे। बैठक की शुरुआत गर्मजोशी भरे स्वागत से हुई। पुतिन और ट्रंप एक ही बुलेटप्रूफ लिमोजिन में बैठे, मुस्कुराते और हाथ मिलाते दिखे। लेकिन इस सौहार्द का असर बैठक के नतीजों पर नहीं पड़ा।

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने कहा कि रूस को युद्ध के मूल कारणों को खत्म करना है। यानी नाटो की सीमा पर मौजूदगी। इस बयान से स्पष्ट हो गया कि युद्ध का अंत फिलहाल संभव नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि अगली बैठक मॉस्को में होनी चाहिए, जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की भूमिका संदिग्ध हो जाएगी। ट्रंप लगातार संवाद और मीडिया से बातचीत में रुचि रखते हैं। वह मात्र साढ़े तीन मिनट बोले और एक भी सवाल नहीं लिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह नाटो और जेलेंस्की को बैठक के बारे में बताने के लिए कुछ फोन कॉल करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बेहद कमजोर परिणाम माना जा रहा है।

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बैठक में रूस की ओर से शीर्ष आर्थिक सलाहकार भी मौजूद थे। हार्वर्ड-शिक्षित किरील दिमित्रिएव समेत कई प्रतिनिधियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि रूस ने इस शिखर वार्ता को व्यापारिक अवसर के रूप में भी देखा। यूरोपीय नेताओं और यूक्रेन को यह राहत जरूर मिली कि बैठक में यूक्रेन की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, पुतिन का मूल कारणों के उन्मूलन वाला बयान संकेत देता है कि युद्ध और लंबा खिंच सकता है।

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किसके खाते में जीत?
ट्रंप के लिए जीत तब होती यदि वह तत्काल युद्धविराम करवा पाते। पुतिन के लिए जीत यही थी कि वे अस्पष्ट शब्दों में आगे की बातचीत पर सहमति जताएं और युद्ध जारी रख सकें। नतीजा साफ है। अलास्का में हुई इस ऐतिहासिक भेंट से पुतिन ने पूर्ण जीत हासिल की। 1867 में रूस ने पैसों की तंगी में अलास्का अमेरिका को बेच दिया था। लेकिन 2025 में भू-राजनीतिक मुकाबले में पुतिन अलास्का से विजयी लौटे।

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