राजस्थान डिस्कॉम: 1352 करोड़ कर्ज घटा, रिकॉर्ड राजस्व वसूली दर्ज

जयपुर

राजस्थान की बिजली वितरण कंपनियों (Rajasthan Discom) की आर्थिक सेहत में बड़ा सुधार देखने को मिला है. सालों से घाटे और कर्ज से जूझ रही इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी देनदारियों में 1352 करोड़ रुपये की कटौती की है. सरकार की सख्त निगरानी और बिजली बिलों की रिकॉर्ड वसूली ने इस मुश्किल लक्ष्य को आसान बना दिया.

कैसे घटा कर्ज का भारी भरकम बोझ?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की तीनों डिस्कॉम पर साल 2024-25 में कुल 97,970 करोड़ रुपये का संयुक्त कर्ज था. बेहतर मैनेजमेंट के चलते अब यह घटकर 96,618 करोड़ रुपये रह गया है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशन में विभाग ने न केवल खर्चों पर लगाम लगाई, बल्कि पुराने बकाये की वसूली पर भी जोर दिया.

ये भी पढ़ें :  ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047: अब तक प्राप्त हुए लगभग 45 लाख फीडबैक

अजमेर और जयपुर डिस्कॉम ने किया टॉप
कर्ज घटाने की इस दौड़ में अजमेर डिस्कॉम सबसे आगे रहा, जिसने अपनी देनदारियों में 935 करोड़ रुपये की कमी की. वहीं, जयपुर डिस्कॉम ने भी 644 करोड़ रुपये का कर्ज कम किया. हालांकि, जोधपुर डिस्कॉम के लिए चुनौतियां बरकरार हैं, जहां कर्ज 36,792 करोड़ से मामूली बढ़कर 37,019 करोड़ रुपये हो गया है.

ये भी पढ़ें :  राजस्थान में UCC की तैयारी तेज: समान नागरिक संहिता से बदल सकती है निजी जीवन की व्यवस्था

सस्ती ब्याज दरों का मिला सहारा
राज्य सरकार ने डिस्कॉम को कर्ज के जाल से निकालने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) से हाथ मिलाया. यहां से डिस्कॉम को महज 8.75 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर लोन मिला. ब्याज दरों में हुई 0.90% से 1.40% तक की इस कटौती ने महंगे पुराने कर्जों को खत्म करने में संजीवनी का काम किया.

इतिहास में पहली बार 100% से ज्यादा वसूली
इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि राजस्व वसूली रही. राजस्थान के इतिहास में पहली बार तीनों डिस्कॉम ने 100 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रह किया है:-
    जयपुर डिस्कॉम: 102% वसूली
    अजमेर डिस्कॉम: 100.23% वसूली
    जोधपुर डिस्कॉम: 100.96% वसूली

ये भी पढ़ें :  राजस्थान-सिरोही में जमानत पर छूटे आरोपी गिरफ्तार, डेढ़ महीने पहले की थी लूट

खराब मीटरों का समाधान और बचत
जयपुर डिस्कॉम ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपने सभी सर्किलों में खराब पड़े बिजली मीटरों को बदल दिया है. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि औसत बिलिंग (Average Billing) के मामलों में कमी आई और विभाग को करीब 1.9 करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई.

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment