आध्यात्म डेस्क, न्यूज राइटर
नेहा शर्मा, उज्जैन, 11 फरवरी, 2023
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में शुक्रवार से शिवनवरात्री की शुरुआत हो गई है। पुजारियों ने भगवान महाकाल को चंदन का उबटन लगाकर दूल्हा बनाया। नवीन वस्त्र धारण कराकर आरती की। इसके साथ ही अब नौ दिनों तक भगवान का विभिन्न रूपों में श्रृंगार किया जाएगा।
11 ब्राह्मण ने किया भगवान का अभिषेक
शिवनवरात्र के पहले दिन नैवेद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन और कोटितीर्थ के समीप स्थित भगवान कोटेश्वर व रामेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन किया गया। इसके बाद गर्भगृह में पुजारी घनश्याम गुरू के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मण ने भगवान का अभिषेक कर एकादश-एकादशनी रुद्र पाठ किया। आज दोपहर दो बजे भोग आरती और तीन बजे संध्या पूजा के बाद भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे। शिवनवरात्र के पहले दिन भगवान को सोला, दुपट्टा व जलाधारी पर मेखला धारण कराने के साथ रजत आभूषण से श्रृंगार किया गया।
पुजारी और भक्तों के उपवास शुरू
देवी दुर्गा की उपासना करने वाले भक्त जिस तरह चैत्र व शारदीय नवरात्र में उपवास रखते हैं। इसी प्रकार शिव के उपासक शिवनवरात्रि करते हैं। पुजारी महेश गुरू के अनुसार महाकाल मंदिर के पुजारी, पुरोहित, भक्त भी शुक्रवार से नौ दिन तक उपवास शुरू करेंगे।
इस समय प्रवेश रहेगा बंद
प्रातः काल से होने वाले प्रत्येक दिवस के विशिष्ट पूजन से सांय 4 बजे तक गर्भगृह प्रवेश दर्शनार्थीयों का बंद रहेगा। सांय 4 बजे के पश्चात दर्शनार्थी की सामान्य संख्या होने पर ही आमजन हेतु गर्भगृह दर्शन प्रारंभ किये जा संकेंगे। इसके बाद दर्शन अभिलाशी गर्भगृह दर्शन रसीद के साथ 9 बजे तक दर्शन हेतु गर्भगृह में जा सकेंगे।
बदल जाएगा पूजा आरती का समय
महाशिवरात्रि के दौरान प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे होने वाली भोग आरती दोपहर 2 बजे दोपहर में होगी। संध्या पूजन शाम 5 बजे के जगह अब 3 बजे होगा होगी। रात्रि में महनिशा काल में अलग-अलग प्रकार से भगवान महाकाल की पूजा की जाएगी।
नौ दिन में होंगे 9 श्रंगार
पहला दिन : चंद्रमोलेश्वर श्रंगार
दूसरा दिन: शेषनाथ शृंगार
तीसरा दिन: घटाटोप शृंगार
चौथा दिन: छबीना शृंगार
पांचवां दिन: होल्कर शृंगार
छठा दिन: मनमहेश शृंगार
सातवां दिन: उमा महेश शृंगार
आठवां दिन : शिव तांडव शृंगार
नवें दिन: भगवान दूल्हा रूप में दर्शन देंगे
नौवें दिन होगा ये खास शृंगार
नौ और आखिरी दिन दूल्हा रूप में दर्शन देने का साथ बाबा महाकाल का सप्तधान रूप में शृंगार कर फल व फूलों से बना सेहरा सजाया जाएगा। सोने के आभूषण धारण कराए जाएंगे और इसके बाद दोपहर में भस्मारती होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।