रायपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में घोटुल परंपरा आदिवासी संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक शिक्षा का एक अनूठा और जीवंत केंद्र है। अब अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों (जैसे झारावाही) में ग्रामीण अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय लकड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से दोबारा पारंपरिक घोटुल तैयार कर रहे हैं। बुजुर्गों द्वारा युवाओं को समाज के नियम, परंपराएं, संगीत, नृत्य और जीवनोपयोगी दायित्व सिखाए जाते हैं। 'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं अबूझमाड़ की शाम अब भय के साये से मुक्त होकर अपनी पौराणिक और…
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