हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. इस हिसाब से देखा जाए तो अभी कलयुग का बहुत छोटा हिस्सा ही बीता है और इसका लंबा समय बाकी है. सबसे प्रचलित मान्यता मान्यता के अनुसार, चारों युगों की अवधि इस…
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क्या कलयुग अपने अंत की ओर है? जानिए शास्त्रों में क्या दिए गए हैं संकेत
क्या सच में कलयुग अपने अंतिम चरण पर है? आज के समय में टूटते रिश्ते, घटता भरोसा और बदलती जीवनशैली कई सवाल खड़े कर रही है. हर दिन की खबरें बताती हैं कि सही और गलत के बीच की रेखा धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है. इंसानियत कमजोर पड़ती नजर आ रही है. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह सिर्फ आधुनिकता का असर है या फिर उन संकेतों की शुरुआत, जिनका जिक्र हमारे शास्त्रों में पहले ही किया जा चुका है. शास्त्रों के अनुसार, जब पाप…
Read Moreमहाभारत के श्राप और कलयुग का संबंध, युधिष्ठिर से लेकर अश्वत्थामा तक की कथाएं
महाभारत सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि जीवन का एक बड़ा ग्रंथ माना जाता है. यह कौरवों और पांडवों के बीच हुआ युद्ध था, जो धर्म और अधर्म की लड़ाई का प्रतीक है. इसमें हमें कर्म, सत्य, रिश्तों और निर्णयों के परिणाम के बारे में गहरी सीख मिलती है. इस दौरान कई ऐसे श्राप दिए गए, जिन्हें लेकर मान्यता है कि उनका असर आज के कलयुग में भी देखा जाता है. इन श्रापों को लोग कर्मों के फल और चेतावनी के रूप में देखते हैं. तो आइए विस्तार से…
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