सनातन परंपरा और पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में चार युगों का वर्णन मिलता है, जिनमें कलयुग को सबसे अंतिम और संक्रमण काल माना गया है. हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने कलयुग के चरम पर पहुंचने को लेकर कई ऐसी चौंकाने वाली भविष्यवाणियां की थीं, जो आज के आधुनिक समाज, गिरते नैतिक मूल्यों और बदलती जीवनशैली में बिल्कुल सटीक बैठती दिखती हैं. ग्रंथों के अनुसार, कलयुग केवल समय का चक्र नहीं है, बल्कि यह मानवीय चेतना, धर्म और प्रकृति के पतन का दौर है. वहीं इन भविष्यवाणियों…
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