एनसीआरबी रिपोर्ट: अपराध के मामलों में यूपी की स्थिति काफी बेहतर फिरौती के लिए अपहरण तथा डकैती के मामलों में यूपी देश में सबसे निचले पायदान पर महिलाओं के प्रति अपराधियों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश देश में नंबर-1 लखनऊ राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2024 के आंकड़ों ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की बेहतर स्थिति को दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का क्राइम…
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एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी
एनसीआरबी के आंकड़े यूपी की मजबूत कानून-व्यवस्था की गवाही: डीजीपी राष्ट्रीय क्राइम रेट से काफी कम रहा यूपी का क्राइम रेट अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति धरातल पर उतरी लखनऊ पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 रिपोर्ट निर्विवाद रूप से स्थापित करती है कि क्राइम रेट ही विभिन्न राज्यों के बीच अपराध की तुलना का एकमात्र वैज्ञानिक और सांख्यिकीय दृष्टि से उचित आधार है। राष्ट्रीय क्राइम रेट 252.3 के मुकाबले उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट मात्र 180.2 है।…
Read Moreलगातार 4 साल महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दिल्ली टॉप पर, NCRB डेटा ने फिर दिखाया आईना
नई दिल्ली भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सबसे असुरक्षित महानगरों की सूची में पहले नंबर पर आ गई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली लगातार चौथे वर्ष देश के सबसे असुरक्षित महानगर के रूप में उभरी है. रिपोर्ट बताती है कि अन्य मेट्रो शहरों के मुकाबले दिल्ली में सबसे ज्यादा महिलाओं के खिलाफ अपराध किए गए हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों में भले ही दिल्ली में कुल आईपीसी और बीएनएस अपराधों में 15.1% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई और…
Read Moreदेश में महिला अपराधों में 0.7% की बढ़ोतरी, 2023 में 4.48 लाख मामले दर्ज
नई दिल्ली सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की तमाम कोशिशों के बावजूद साइबर अपराधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है। साइबर अपराधों में 2022 की तुलना में 2023 में 31.2 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2023 की रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराधों में 28.8 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई है। अनुसूचित जातियों, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध भी अपराध बढ़े हैं। जबकि हत्या के मामलों और वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराधों में मामूली…
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