नई दिल्ली यदि आंशिक रूप से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकी तो संकट कहीं अधिक गहरा होगा। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसी स्थिति में उसके लिए भी संकट पैदा होगा और पूरे हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के चलते दुनिया भर में कच्चे तेल को लेकर दबाव की स्थिति है। हालात ऐसे हैं कि चंद दिनों में ही कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।…
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