नई दिल्ली दशकों से रावी की लहरें अपनी ही मिट्टी को प्यासा छोड़कर सरहद पार उस मुल्क की ओर बह जाती थीं जिसने दोस्ती के बदले हमेशा दगा दिया. लेकिन अब वक्त बदल चुका है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर भारत ने पानी की एक ऐसी लक्ष्मण रेखा खींच दी है जिसने भूगोल और किस्मत दोनों को बदल कर रख दिया. शाहपुर कंडी बैराज के कपाट क्या खुले मानो हिमालय की गोद से निकला नीर भारत की संप्रभुता का शंखनाद करने लगा. पहली बार रावी का पानी अपनी पुरानी राह…
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