यूनेस्को की एचयूएल पहल से ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा

भोपाल/ओरछा
 मध्य प्रदेश के ओरछा में ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को की हिस्टोरिक अर्बन लैंडस्केप (एचयूएल) पहल के तहत सोमवार को होटल बेतवा रिट्रीट में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह पहल मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से ग्वालियर और ओरछा के लिए लागू की जा रही है, जो दक्षिण एशिया में पहली बार यूनेस्को द्वारा चुने गए शहर हैं।यूनेस्को ने 24 मई 2023 को इन शहरों के लिए अंतिम एचयूएल रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें ऐतिहासिक इमारतों के आसपास निर्माण के लिए मास्टर प्लान और विशेष दिशानिर्देश शामिल हैं। इन सिफारिशों को ओरछा के मास्टर प्लान में शामिल करने के लिए विभिन्न विभागों को भेजा गया है।

ये भी पढ़ें :  अग्निवीर भर्ती : ग्वालियर में तीन परीक्षा केंद्रों पर 30 जून से 10 जुलाई के बीच ऑनलाइन लिखित परीक्षा होगी

अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, सुश्री बिदिशा मुखर्जी ने इस मौके पर कहा, “ओरछा की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एचयूएल पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। ओरछा का बढ़ता पर्यटन क्षेत्र हमारी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिला रहा है।”

ये भी पढ़ें :  आरक्षक (जी.डी.) भर्ती 2025: दूसरे चरण की शारीरिक दक्षता परीक्षा का कार्यक्रम जारी

कार्यशाला में ओरछा की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए आर्थिक विकास पर चर्चा हुई। इस दौरान हेरिटेज वाक का आयोजन भी किया गया। यूनेस्को की यह पहल 2011 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य शहरी विरासत को संरक्षित करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देना है। कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि ओरछा में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाएगा, ताकि इसे वैश्विक पहचान मिल सके।

ये भी पढ़ें :  शिवपुरी के रातौर रेलवे ट्रैक के पास एक नवविवाहिता चलती ट्रेन से नीचे गिरी, हुई मौत

इस पहल से ओरछा में स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं और पर्यटन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए टूरिज्म बोर्ड लगातार प्रयास कर रहा है। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो ओरछा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व संरक्षित होगा, साथ ही समग्र विकास को गति मिलेगी।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment