जैसलमेर की झील किनारे मिला रहस्यमयी ढांचा, क्या है डायनासोर से कनेक्शन?

 
जैसलमेर

जैसलमेर के मेघा गांव के पास तालाब किनारे खुदाई के दौरान रहस्यमयी जीवाश्म मिले हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जुरासिक काल के उड़ने वाले डायनासोर का हिस्सा हो सकता है। प्राथमिक जांच में यह संरचना रीढ़ की हड्डी जैसी प्रतीत हो रही है, जबकि इसका बड़ा हिस्सा 15 से 20 फीट जमीन के अंदर दबा हुआ है।

भूजल वैज्ञानिक नारायण दास इणखिया ने दावा किया कि यह जैसलमेर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा कंकाल है। उनका कहना है कि जियोलॉजिकल सर्वे की टीम इसकी जांच करेगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जीवाश्म किस प्रजाति का है और कितने वर्ष पुराना है।

ये भी पढ़ें :  बजरी माफिया की बढ़ती हिम्मत प्रशासन के लिए चुनौती, पुलिस जवान पर चढ़ाया वाहन

डॉ. इणखिया के अनुसार, यह अवशेष लाखों-करोड़ों साल पुराने हो सकते हैं। अगर यह अन्य जानवर की हड्डियां होतीं तो समय के साथ नष्ट हो जातीं। लेकिन इनके सुरक्षित रहने से यह माना जा रहा है कि यह जीवाश्म बनने की प्रक्रिया में जम चुके हैं। उनका अनुमान है कि यह करीब 20 फीट लंबे किसी उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल हो सकता है।

ये भी पढ़ें :  परिसीमन रद्द होने के बाद निकाय चुनाव पर संकट, समय-सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अहम

गौरतलब है कि जैसलमेर क्षेत्र प्राचीन भूगर्भीय इतिहास से जुड़ा है। करीब 25 करोड़ वर्ष पहले यह इलाका समुद्र का हिस्सा हुआ करता था, जहां डायनासोर भोजन की तलाश में आते थे। यही कारण है कि यहां समय-समय पर जीवाश्म और प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में डॉ. इणखिया को जेठवाई पहाड़ी पर मॉर्निंग वॉक के दौरान डायनासोर के अंडे का जीवाश्म मिला था। वहीं थईयात की पहाड़ियों में भी डायनासोर के पैरों के निशान और हड्डियां खोजी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसलमेर में मिले ये नए अवशेष भारत की पुरातत्व और भूगर्भीय धरोहर को और समृद्ध करेंगे। वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह सचमुच उड़ने वाले डायनासोर का कंकाल है या किसी अन्य प्राचीन जीव का अवशेष।

ये भी पढ़ें :  मुख्यमंत्री निवास पर जनसुनवाई: आमजन की परिवेदनाओं का त्वरित समाधान, जनता में संतोष

 

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment