फार्मर्स आईडी से किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

फार्मर्स आईडी से किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में जारी है फार्मर आईडी बनाने का अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

फार्मर आईडी में होगी किसानों से संबंधित समग्र जानकारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का किसानों को मिलेगा लाभ

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 20 अगस्त से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जारी देश की डिजिटल क्रांति ने हाल के वर्षों में डिजिटल पहचान, सुरक्षित भुगतान और लेनदेन के माध्यम से शासन और सेवा वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। प्रदेश के किसानों की फार्मर आईडी बनवाने का अभियान आरंभ किया है। शासकीय दल स्वयं किसानों के पास जाकर उनकी फार्मर आईडी बनवा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी किसानों से अपनी फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन के प्रयासों ने वित्त, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा सहित जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में एक संपन्न डिजिटल वातावरण का निर्माण किया है। कृषि क्षेत्र में ऐसे ही बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर डिजिटल कृषि मिशन को एक व्यापक योजना के रूप में क्रियान्वित किया गया है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक अधोसंरचना का निर्माण, डिजिटल फसल अनुमान सर्वेक्षण लागू करना और केंद्र व राज्य सरकारों तथा कृषि से जुड़ी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक स्तर पर डिजिटल पहल को अपनाना शामिल है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रॉस्ट्रक्चर का ग्राम और किसान स्तर तक लगतार विस्तार किया जा रहा है। इसके अंर्तगत कृषि से संबंधित जानकारियां और सेवाएं समय पर व्यक्तिगत तरीके से और पूर्ण विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड के समान 'किसान आईडी' की शुरुआत की गई है। यह आईडी किसानों के लिए एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान के रूप में काम करती है। फार्मर आईडी, भूमि अभिलेखों, पशुधन स्वामित्व, बोई गई फसल और प्राप्त लाभ सहित विभिन्न किसान-संबंधित डेटा से जुड़ी होंगी। उल्लेखनीय है कि किसान आईडी के निर्माण और डिजिटल फसल सर्वेक्षण का परीक्षण करने के लिए छह राज्यों क्रमश: उत्तरप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु में पायलट परियोजनाएं संचालित की गई थीं।

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