गिरती जन्मदर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ती जा रही, ट्रंप कर रहे आग्रह, बच्चे पैदा कीजिए और पाएं शानदार ऑफर!

वाशिंगटन
अमेरिका में लगातार गिरती जन्मदर को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सुपरपावर कहे जाने वाले इस देश में घटती प्रजनन दर एक गंभीर विषय बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप महिलाओं को शादी के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर अपने सलाहकारों से विचार-विमर्श कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके करीबी सहयोगी अमेरिकियों से अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह कर रहे हैं और इसके लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की बात भी कह रहे हैं। आइए जानते हैं कि अमेरिका के अलावा दुनिया के और कौन से देश हैं जो जन्मदर बढ़ाने के लिए पैसे दे रहे हैं:

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व्हाइट हाउस में जन्मदर बढ़ाने को लेकर कुछ दिलचस्प सुझाव आए हैं। इनमें से एक असामान्य विचार यह है कि फुलब्राइट स्कॉलरशिप का 30% विवाहित या बच्चों वाले लोगों के लिए आरक्षित किया जाए। इसके अतिरिक्त प्रत्येक नवजात शिशु की मां को 5000 डॉलर का 'बेबी बोनस' देने का प्रस्ताव भी है। गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी अमेरिका में एक नए 'बेबी बूम' का आह्वान कर चुके हैं।

अमेरिका के अलावा कई अन्य देश भी जन्मदर बढ़ाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दे रहे हैं:
चीन: यहां अधिक बच्चे पैदा करने पर चाइल्डकेयर सब्सिडी मिलती है। कई शहरों में तो पहले बच्चे के लिए लगभग 13,800 डॉलर (1 लाख युआन) तक की सब्सिडी दी जाती है।

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स्विट्जरलैंड: अल्बिनेन गांव में घटती आबादी को रोकने के लिए सरकार नवविवाहित जोड़ों को 50 लाख रुपये से अधिक और प्रत्येक वयस्क सदस्य को 22 लाख रुपये से अधिक देती है। इसके अलावा प्रत्येक बच्चे के लिए लगभग आठ लाख रुपये दिए जाते हैं।

जर्मनी: जर्मनी में माता-पिता को पहले या दूसरे हर बच्चे के लिए प्रति माह 250 यूरो (लगभग 23,572 रुपये) मिलते हैं।

फिनलैंड: यहां नवजात बच्चे के लिए सरकार लगभग 7 लाख 86 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करती है जिसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।

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फ्रांस: फ्रांस की सरकार भी बच्चे पैदा करने के लिए वित्तीय सहायता देती है। गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के 28वें सप्ताह के बाद लगभग 900 यूरो मिलते हैं साथ ही 16 सप्ताह की सवेतन मातृत्व अवकाश भी मिलता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका जन्मदर बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और क्या इन वित्तीय प्रोत्साहनों से देश की डेमोग्राफी में कोई महत्वपूर्ण बदलाव आता है। फिलहाल यह मुद्दा अमेरिका में एक गरमागरम बहस का विषय बना हुआ है।

 

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