मेक इन इंडिया के तहत रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी बनने को तैयार

भोपाल 

मध्यप्रदेश रक्षा और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए नई पहचान बना रहा है। अनुकूल औद्योगिक माहौल, मजबूत बुनियादी ढांचा और अग्रणी नीतियों के बल पर राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार का नया केंद्र बनता जा रहा है। इसी उद्देश्य से रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और नए अवसरों पर चर्चा के लिए रक्षा इंडस्ट्री इंटरेक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।

रक्षा उत्पादन विभाग, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. गरिमा भगत ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण का हब बनने की अपार संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि एमएसएमई और स्टार्टअप को मजबूत सहयोग देकर उन्हें राष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भागीदार बनाया जाए। उद्योग, अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच निरंतर सहयोग ही इस क्षेत्र में नवाचार को गति देगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। संयुक्त सचिव डॉ. भगत ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एमएसएमई को रक्षा पीएसयू और बड़े प्राइवेट सेक्टर से सीधे जोड़ते हैं जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट वेंचर और महत्वपूर्ण प्रणालियों के सह-विकास के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि एसआरआईजन पोर्टल पर अब तक 39 हजार से अधिक प्रोडक्ट स्वदेशीकरण के लिए सूचीबद्ध हैं, जो निवेशकों और स्टार्टअप के लिए बड़े अवसर पैदा करते हैं। कार्यक्रम के दौरान जबलपुर के रक्षा उद्योग के मजबूत ईकोसिस्टम और वेंडर बेस पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. गरिमा भगत ने बताया कि जबलपुर में 300 करोड़ रु. की लागत से एक मैन्युफैक्चरिंग, रिपेयर एंड ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा स्थापित की जा रही है, जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए बड़े अवसर तैयार होंगे।

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औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति और अनुकूल औद्योगिक वातावरण के कारण रक्षा निर्माण में निवेश के लिए देश का सबसे स्वाभाविक और सर्वोत्तम स्थान है। राज्य में ऑटो क्लस्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, तकनीकी वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स सैक्टर रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से विकसित हो रहे हैं। राज्य की एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी 2025 के अंतर्गत भूमि रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, साथ ही पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी और आरएंडडी, टेस्टिंग जैसी सुविधाओं पर आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश अपनी प्रगतिशील नीतियों, सुदृढ़ औद्योगिक ढांचे और भारत सरकार के साथ मजबूत साझेदारी के माध्यम से रक्षा उत्पादन और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आयुक्त एमएसएमई सुप्रीति मैथिल ने भी एमएसएमई में डिफेंस सैक्टर के संबंध में जानकारी साझा की।

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कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा पीएसयू, निजी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षाविद और शोध संस्थान शामिल थे। प्रतिभागियों में अदाणी डिफेंस, बीईएल, हिंदुस्तान शिपयार्ड, गन कैरिज फैक्ट्री, ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, एचईजी, जेबीएम, विनायक इंजीनियरिंग, सीआईपीईटी भोपाल, आईआईएसईआर भोपाल और सीएसआईआर-एएमपीआरआई जैसी अग्रणी इकाइयां शामिल रहीं।

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संवाद सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने वाहनों, पुर्जों, प्रोटेक्टिव गियर, टेलीकॉम सिस्टम, एम्युनिशन और एडवांस मटेरियल्स के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर बातचीत की।

 

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