ऑनलाइन गेमिंग की लत ने बुझाए इंदौर के सैकड़ों घरों के चिराग, पांच सालों में बढ़ा दर्दनाक आंकड़ा

 इंदौर
 ऑनलाइन गेमिंग से अपना सबकुछ गंवा रही युवा पीढ़ी और इसकी लत का शिकार हुए अपने नौनिहालों को गंवा रहे परिवारों को अब जाकर राहत मिलने की उम्मीद जागी है। प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद ऑनलाइन मनी गेम्स पर प्रतिबंध लगाए जाने की राह भी साफ हो गई है। देशभर में बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि गंवाने के अलावा सैकड़ों युवाओं ने आत्महत्या भी कर ली।

2020 में इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग के खिलाफ जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार तथा गेमिंग कंपनियों के अलावा इसका प्रचार करने वाले खिलाड़ियों और फिल्म सितारों को भी नोटिस दिए गए थे। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में कई दर्दनाक घटनाएं सामने आईं। 13 वर्षीय छात्र आकलन जैन ने ऑनलाइन गेम खेलते हुए अपनी मां का डेबिट कार्ड इस्तेमाल कर लगभग 2,800 रुपये गंवा दिए।

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डर और तनाव के कारण एक अगस्त को उसने आत्महत्या कर ली। उसके स्वजन आज भी यह दर्द नहीं भूल पाए हैं। स्वजन ने कहा कि हमारा बेटा होनहार था। अगर पहले ही सरकार गेमिंग पर सख्ती करती तो शायद वह आज जीवित होता।

नशे की तरह है गेमिंग की लत

गेमिंग की लत नशे जैसी होती है। मरीज जब तक गेम नहीं खेलता, बेचैन रहता है। कई मामलों में लोग सारी कमाई एक हफ्ते में ऑनलाइन गेम में उड़ा देते हैं। इलाज के दौरान उन्हें दवा के साथ-साथ काउंसलिंग और बैंक खाते में सीमित पैसे रखने जैसी सलाह दी जाती है। माता-पिता को बच्चों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। – डॉ. कृष्णा मिश्रा, मनोचिकित्सक

केस 1 : मार्च में इंदौर के 16 वर्षीय छात्र प्रिंस का मामला भी पूरे शहर को झकझोर गया था। वह ऑनलाइन गेम्स का आदी था और जब उसका फोन चोरी हो गया तो उसे तुरंत नया फोन नहीं मिल सका। गुस्से और बेचैनी में उसने जहर खा लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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केस 2 : 25 वर्षीय जितेंद्र वास्कले इंदौर में पढ़ाई के साथ सुरक्षा गार्ड का काम करता था। ऑनलाइन गेमिंग में फंसकर उसने लोन ले लिया, लेकिन लगातार हारने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। दबाव और निराशा में उसने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उसने साफ लिखा कि वह कर्ज और गेमिंग लत से टूट चुका है।

केस 3 : 24 वर्षीय एक नौकरीपेशा युवक जो हर माह 50 हजार रुपये कमाता था, यह पैसा वह एक ही हफ्ते में गेम में उड़ा देता था। इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंचा। उसे ऑनलाइन गेम की लत बार-बार तलब होती थी। जब तक गेम नहीं खेलता था, बेचैन रहता था। उसके लिए गेम नशे की तरह एडिक्शन रहता है। डॉक्टरों ने खाते में कम रुपये रखवाए। इसके साथ ही दवाइयां भी दी। करीब छह माह इलाज के बाद वह अब स्वस्थ है।

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ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से हुई ठगी

मंदसौर में ऑनलाइन गेम की लत से कई लोगों ने रुपये गंवाए हैं। लोक-लाज के भय से अधिकांश पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे। 15 दिसंबर 2024 को इंदौर क्राइम ब्रांच ने मंदसौर के आठ सदस्यीय गिरोह को गिरफ्तार किया था, जो ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से फ्राड करते थे। यह ठग लोगों से लिए रुपये अलग-अलग खातों में डालकर उन्हें आइडी और पासवर्ड देते थे।

उसी आइडी से लोग वेबसाइट पर सट्टा खेलते थे। आरोपितों के पास से करोड़ों का हिसाब-किताब मिला था। पुलिस ने मंदसौर के परीक्षित लोहार, रोशन लालवानी, विजय विश्वकर्मा, अभिषेक यादव, राजेश कोतक, प्रफुल्ल सोनी, महेंद्रसिंह के साथ ही बिहार के रुचित को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के पास से फर्जी बैंक खाते नंबर भी मिले थे। मोबाइल में दुबई मनी एक्सचेंज करने वाले लोगों के नंबर भी मिले थे।

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