65 करोड़ PhonePe यूजर्स को बड़ी राहत: RBI की मंजूरी के बाद पेमेंट सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली

भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी phone-pe को रिजर्व बैंक से एक बड़ी अनुमति मिल गई है, जो न सिर्फ कंपनी के कारोबार के लिए बल्कि करोड़ों छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए भी बेहद अहम है। अब तक सिर्फ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की सुविधा देने वाली Phone-Pe को आरबीआई ने online payment aggregator के रूप में कार्य करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है।

इस नए दर्जे के साथ अब phone-pe सीधे मर्चेंट्स (दुकानदारों व व्यापारियों) को जोड़ पाएगी और उनके ग्राहकों से ऑनलाइन पेमेंट लेकर उन्हें सीधे उनके खाते में ट्रांसफर कर सकेगी। यानी अब फोनपे न केवल ग्राहकों को भुगतान सेवा देगी, बल्कि खुदरा व्यापारी भी इसके माध्यम से तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक पेमेंट कलेक्शन सिस्टम का लाभ ले पाएंगे।

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phone-pe के मर्चेंट बिज़नेस के प्रमुख युवराज सिंह शेखावत ने कहा कि यह बदलाव खासतौर पर उन छोटे और मध्यम कारोबारियों (SMEs) के लिए फायदेमंद होगा जो अभी तक डिजिटल पेमेंट की दुनिया में पीछे रह गए थे। अब वे भी आधुनिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर पाएंगे, जिससे उनका व्यवसाय और तेज़ी से डिजिटल हो सकेगा।

इस अनुमति के साथ phone-pe अब अपने पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म को और बेहतर बना सकेगा – ऐसा सिस्टम जो मर्चेंट्स को कुछ ही मिनटों में ऑनबोर्ड करता है, आसान इंटीग्रेशन की सुविधा देता है, और ग्राहक को स्मूद चेकआउट एक्सपीरियंस प्रदान करता है।

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भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल phone-pe
phone-pe 2016 में लॉन्च हुई थी और आज यह भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल है। इसके पास 65 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूज़र्स, 4.5 करोड़ से अधिक मर्चेंट्स का नेटवर्क और प्रतिदिन 36 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन्स हैं। कंपनी का विस्तार अब पेमेंट्स से आगे बढ़कर लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स और यहां तक कि स्वदेशी app Store तक हो चुका है।

क्या है online payment aggregator?
online payment aggregator दरअसल एक ऐसा डिजिटल माध्यम होता है जो व्यापारियों को उनके ग्राहकों से विभिन्न डिजिटल तरीकों से पेमेंट स्वीकार करने में मदद करता है – चाहे वो UPI हो, कार्ड्स हों या वॉलेट्स। इस प्रक्रिया में मर्चेंट को ऑनबोर्ड किया जाता है, फिर उनकी वेबसाइट या ऐप में पेमेंट गेटवे को जोड़ा जाता है। इसके बाद ग्राहक अपना मनचाहा पेमेंट विकल्प चुनकर भुगतान करता है और सिस्टम उस पेमेंट को प्रोसेस कर मर्चेंट को ट्रांसफर कर देता है।

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RBI की यह मंजूरी फोनपे के लिए महज एक लाइसेंस नहीं, बल्कि नए युग का प्रवेशद्वार है – जहां यह कंपनी देश के कोने-कोने में बैठे छोटे दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में एक मजबूत कड़ी बन सकती है।

 

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