पहलगाम घटना पर बोले मोहन भागवत: कौन मित्र और कौन शत्रु, समझना जरूरी

नागपुर 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 100 साल का हो चुका है। अपने स्थापना दिवस (विजयादशमी) पर आज नागपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें यह सिखा गई कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन। आपको बता दें कि शस्त्र पूजा के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई।

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मोहन भागवत ने कहा, ''22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीय नागरिक पर्यटकों की हिंदू धर्म के बारे में पूछकर हत्या कर दी। इस हमले से पूरे भारत में शोक, उदासी और आक्रोश की लहर दौड़ गई। भारत सरकार ने एक सुनियोजित योजना के तहत मई माह में इस हमले का माकूल जवाब दिया। इस पूरी अवधि के दौरान, हमने देश के नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सशस्त्र सेनाओं की वीरता और युद्ध-तत्परता तथा हमारे समाज के दृढ़ संकल्प और एकता के हृदयस्पर्शी दृश्य देखे।''

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मोहन भागवत ने आगे कहा, 'यह घटना हमें यह भी सिखा गई कि हम भले ही सबके प्रति मित्र भाव रखें, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना होगा। इस पूरी घटना के बाद हमने दुनिया के कई देशों का स्टैंड देखा। इस घटना ने हमें यह भी सीख दी कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन।''

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आरएसएस मुख्यालय के रेशमबाग मैदान में शस्त्र पूजा के दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा ‘पिनाक एमके-1’, ‘पिनाक एन्हांस’ और ‘पिनाक’ सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए। इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है।

 

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